CRS NEWS:- Jantar-Mantar नई दिल्ली: Jantar-Mantarपर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस बर्बरता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूरे मामले पर सुनवाई करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के संकेत दिए हैं।
यहाँ जानें इस मामले में Supreme Court की मुख्य टिप्पणियाँ और दिए गए अंतरिम आदेश:
1. स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच पर कोर्ट का ज़ोर
कोर्ट ने प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर माना कि इस मामले में एक पारदर्शी और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
संवैधानिक अधिकार: Supreme Court ने दोहराया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।हिंसा की सच्चाई: कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हिंसा चाहे किसी भी पक्ष से हुई हो, सच सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग की रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट के समक्ष छात्रों और पत्रकारों के घायल होने के अलावा निम्नलिखित साधनों के उपयोग के आरोप सामने रखे गए:
पलेट गन और रबर की गोलियां
इलेक्ट्रिक लाठी और कीलों वाले डंडे
3.Supreme Court के प्रमुख अंतरिम आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने तुरंत प्रभाव से ये आदेश जारी किए:
नाबालिगों की रिहाई: जिन नाबालिग प्रदर्शनकारियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
डिजिटल सबूतों की सुरक्षा: अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और पीसीआर कॉल लॉग जैसे सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें।
निजता का अधिकार: प्रदर्शनकारियों की प्राइवेसी बनाए रखने के लिए उनका निजी डेटा सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी गई।
सुनवाई में सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने निष्पक्ष जांच का समर्थन किया। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि इस हिंसा में 250 से अधिक पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं।
5. भविष्य के लिए SIT का सुझाव और गाइडलाइंस की समीक्षा
कानून-व्यवस्था और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए:मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल के गठन का सुझाव दिया गया।प्रदर्शनों के दौरान पुलिस आचरण से जुड़े वर्ष 2018 के दिशा-निर्देशों (Guidelines) पर पुनर्विचार करने का संकेत दिया गया।इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की गई है। इस सुनवाई में Supreme Court जांच समिति के अंतिम ढांचे और रूपरेखा को तय करेगा।





