
CRS NEWS :- बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की हवाई कार्रवाई।
पाकिस्तानी सेना द्वारा कथित तौर पर किए गए हवाई हमलों के बाद बलूचिस्तान प्रांत में आम नागरिकों की मौतों के कारण स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, सोहराब, खुजदार और कलात जैसे क्षेत्रों में हुए इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित लगभग 30 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई है। इस भीषण त्रासदी के विरोध में पूरे क्षेत्र में आम जनता का आक्रोश फूट पड़ा है और सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं।
दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उनके द्वारा चलाए जा रहे सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) को निशाना बनाना है। सेना के मुताबिक, BLA लगातार सैन्य शिविरों और पुलिस स्टेशनों पर हमले कर रही है। इस टकराव ने पूरे इलाके को एक युद्धक्षेत्र में बदल दिया है, जहां एक तरफ सुरक्षा बल अपने अभियानों को जायज ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों के हताहत होने से जन आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
इस संघर्ष के पीछे गहरा राजनीतिक और ऐतिहासिक असंतोष भी शामिल है। 11 अगस्त को बलूच स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाए जाने के बाद, अलगाववादी समूहों ने 14 अगस्त यानी पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस को “काला दिवस” (Black Day) के रूप में मनाने का आह्वान किया है। यह कदम दोनों पक्षों के बीच की गहरी खाई और अलगाव की भावना को स्पष्ट रूप से उजागर करता है, जिससे क्षेत्र में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय और विदेश मामलों के विशेषज्ञ आलोक बंसल के अनुसार, इस समस्या का समाधान सैन्य ताकत से संभव नहीं दिखता। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ जैसे राजनीतिक नेताओं ने राजनीतिक बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का सुझाव दिया है, लेकिन असीम मुनीर के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार में सेना का दबदबा पूरी तरह कायम है, जो केवल सैन्य बल और कठोर कार्रवाई पर भरोसा कर रही है।
जमीनी हकीकत यह दर्शाती है कि बलूच राष्ट्रवादी समूहों की बड़े शहरों के बाहर विस्तृत इलाकों में मजबूत पकड़ है, जिसके कारण पाकिस्तान के लिए पूर्ण सैन्य विजय पाना लगभग असंभव है। बंसल का मानना है कि यद्यपि बलूच आवाजें वैश्विक मंच पर अपना समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन इस संकट का कोई टिकाऊ समाधान तभी संभव है जब प्रमुख वैश्विक राष्ट्र इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका कोई कूटनीतिक मार्ग प्रशस्त करें।






