
CRS NEWS:- Ugc net paper cancel: 3 विषयों की परीक्षाएं रद्द।
तीन मुख्य विषयों—अंग्रेजी, वाणिज्य (Commerce), और समाजशास्त्र (Sociology)—की UGC NET जून 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद भारत के राष्ट्रीय परीक्षा ढांचे की साख पर एक और बड़ा धक्का लगा है। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के तुरंत बाद हुई इस ताजा विफलता ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की चौतरफा आलोचना को और तेज कर दिया है तथा निष्पक्ष एवं त्रुटिहीन परीक्षाएं आयोजित करने की इसकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परीक्षा के बाद हुई जांच और छात्रों की प्रतिक्रिया से प्रश्नपत्र तैयार करने और गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर व्यवस्थागत खामियां उजागर हुई हैं:
बुनियादी गलतियां और स्पेलिंग की त्रुटियां: रद्द किए गए प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक गलतियां, घटिया हिंदी अनुवाद और व्याकरण संबंधी अशुद्धियां भरी पड़ी थीं। लापरवाही का आलम यह था कि पूरी टेस्ट पुस्तिका में कई विश्व प्रसिद्ध विद्वानों के नामों की वर्तनी (स्पेलिंग) तक गलत लिखी गई थी।
प्रश्नों का भारी दोहराव: जांच से पता चला है कि प्रश्नों का एक बड़ा हिस्सा—विशेष रूप से अंग्रेजी और वाणिज्य के पत्रों में—पिछले वर्षों की परीक्षाओं से सीधे उठा लिया गया था, जिसने प्रश्न-निर्माण प्रक्रिया में निगरानी की भारी कमी को उजागर किया है।
संस्थागत विश्वास में गिरावट: आलोचकों का कहना है कि NTA की गवर्निंग बॉडी में IIT और IIM जैसे शीर्ष संस्थानों के प्रमुख शामिल हैं, फिर भी यह एजेंसी हालिया परीक्षा घोटालों के बाद वादा किए गए सुधारात्मक उपायों को लागू करने में बार-बार विफल रही है।
परीक्षा रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों को अनिश्चितता, वित्तीय बोझ और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
यद्यपि NTA ने घोषणा की है कि पुन:-परीक्षाएं बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के 9 सितंबर (अंग्रेजी और वाणिज्य) और 10 सितंबर (समाजशास्त्र) को आयोजित की जाएंगी, लेकिन छात्र प्रतिनिधियों का तर्क है कि मुफ्त परीक्षा आयोजित कर देने से महीनों की बर्बाद हुई तैयारी, आने-जाने की परेशानी और मानसिक तनाव की भरपाई नहीं हो जाती।
छात्रों का आक्रोश और NTA को भंग करने की मांग
इस घटना ने देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दे दिया है। NSUI और SFI सहित प्रमुख छात्र संगठनों ने केंद्रीयकृत परीक्षा प्रणाली में विश्वास के पूरी तरह खत्म होने का हवाला देते हुए NTA को भंग करने और इसके अध्यक्ष के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पर बढ़ते दबाव के बीच, पूरा देश अब उच्च शिक्षा प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं में पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा बहाल करने के लिए ठोस कदमों का इंतजार कर रहा है।







