
फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों से परीक्षा देने का आरोप, नाम-जन्मतिथि बदलकर परीक्षा में शामिल होने का मामला; एक लाख रुपये का इनाम, मेडल और टैबलेट भी होगा जब्त
CRS NEWS लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा परिषद की वर्ष 2026 की इंटरमीडिएट परीक्षा में टॉप करने वाले रजनीश यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों के आधार पर परीक्षा में शामिल होने और कथित तौर पर नाम व जन्मतिथि में बदलाव कर परीक्षा देने के मामले में उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई है। जांच के बाद संबंधित शैक्षणिक अभिलेखों को अमान्य मानते हुए उसकी डिग्रियां निरस्त करने की कार्रवाई की गई है।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मच गया। रजनीश यादव ने संस्कृत बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था। टॉपर बनने के बाद उसे सम्मानित भी किया गया था। अब कथित फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद उसके सम्मान में मिले पुरस्कारों और अन्य लाभों की वापसी की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
नाम और जन्मतिथि बदलकर परीक्षा देने का आरोप
जांच में आरोप है कि रजनीश यादव ने अपने शैक्षणिक अभिलेखों में दर्ज जानकारी के बजाय बदले हुए नाम और जन्मतिथि का इस्तेमाल करते हुए परीक्षा दी। कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परीक्षा में पंजीकरण कराया गया और इसी आधार पर वह बोर्ड परीक्षा में शामिल हुआ। मामला उजागर होने के बाद संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसमें अभिलेखों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है।
इसके बाद शिक्षा विभाग की ओर से उसके परीक्षा परिणाम और प्रमाणपत्रों की वैधता पर कार्रवाई की गई। जांच में दोष सामने आने पर उसकी डिग्रियां निरस्त किए जाने का निर्णय लिया गया।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों और पहचान संबंधी कथित हेरफेर को लेकर पुलिस ने रजनीश यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब मामले में उससे जुड़े दस्तावेजों, परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक लाख रुपये का इनाम घोषित
मामले में रजनीश यादव की गिरफ्तारी के लिए उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में पूछताछ के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कथित फर्जी दस्तावेज कहां से तैयार कराए गए और परीक्षा में गलत पहचान के आधार पर प्रवेश कैसे मिला।
सीएम ने किया था सम्मानित
रजनीश यादव के प्रदेश टॉपर बनने के बाद उसे मुख्यमंत्री स्तर पर सम्मान भी मिला था। टॉपर के रूप में उसे मेडल और टैबलेट सहित सम्मानित किया गया था। अब परीक्षा परिणाम और डिग्रियां निरस्त होने के बाद उसे दिए गए सम्मान और पुरस्कारों की भी वापसी की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक मेडल और टैबलेट जब्त किए जाने के साथ ही टॉपर के रूप में मिली अन्य सुविधाओं अथवा पुरस्कारों की वसूली का भी प्रावधान लागू किया जाएगा।
टॉपर बनने की पूरी प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस मामले ने संस्कृत बोर्ड की परीक्षा व्यवस्था और अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर नाम और जन्मतिथि में कथित बदलाव के बावजूद अभ्यर्थी का पंजीकरण कैसे हुआ और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति किस स्तर पर मिली, यह जांच का अहम बिंदु बन गया है।
अब पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित फर्जीवाड़ा केवल अभ्यर्थी तक सीमित था या इसमें किसी अन्य व्यक्ति अथवा संस्थान की भी भूमिका रही। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोपों को जांच/पुलिस कार्रवाई के आधार पर बताया गया है। अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानूनन निर्दोष माना जाता है।






