
*समाधान दिवस बना औपचारिकता! शिकायतों पर नहीं हुई कोई कार्यवाही, लेखपाल की लापरवाही से त्रस्त ग्रामीण*
गदागंज (रायबरेली)।
गदागंज थाना परिसर में आयोजित समाधान दिवस एक बार फिर औपचारिकता बनकर रह गया। उपजिलाधिकारी डलमऊ फरीद अहमद खान व थाना प्रभारी बालेंदु गौतम की अध्यक्षता में हुए इस समाधान दिवस में कुल 18 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन एक भी शिकायत का मौके पर निस्तारण नहीं हो सका। फरियादी निराश होकर बैरंग लौट गए।
सबसे पहली शिकायत धमधमा गांव निवासी लाल मोहम्मद ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में उन्हें गाटा संख्या 40 पर आवासीय पट्टा मिला था, लेकिन दबंगों ने उक्त भूमि पर जबरन कब्जा कर छप्पर व लकड़ी रख दी है। वे 2023 से अब तक 10 शिकायती पत्र दे चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जब इस मामले की जांच के लिए क्षेत्रीय लेखपाल मनोज पाल से पूछा गया कि वे मौके पर क्यों नहीं जाते, तो उन्होंने बेहद गैरजिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा – “जब पहले के लेखपाल ने कुछ नहीं किया तो हम क्यों करें।” इस जवाब से लेखपाल की घोर लापरवाही व संवेदनहीनता उजागर होती है।
एक अन्य शिकायत पूरे नब्बा सिंह गांव निवासी बलिकरन सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि गांव के ही देवेंद्र सिंह ने उनकी भूमि में जबरन 12 फुट लट्ठा जोत लिया है, जिसकी नाप कर पुनः कब्जा दिलाने की मांग की गई है।
अधिकांश शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित थीं, लेकिन किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई।
उपजिलाधिकारी फरीद अहमद खान ने हल्का लेखपालों व कानूनगो को निर्देशित किया कि सभी शिकायतों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।
इस मौके पर कानूनगो उदय सिंह, लेखपाल शिवप्रकाश त्रिवेदी, आदित्य पटेल, दिनेश चौरसिया, मनोज पाल, ग्राम प्रधान हरीशंकर वर्मा, करन बहादुर सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
समाधान दिवस का उद्देश्य जनता की समस्याओं का मौके पर समाधान करना होता है, लेकिन जब अधिकारी व कर्मचारी ही अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लें तो फरियादी कहां जाएं? लेखपाल की लापरवाही और अधिकारियों की निष्क्रियता प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।










