
ऊंचाहार, रायबरेली। सूबे के मुखिया के सजातीय होने का रौब झाड़ने वाले लेखपाल की भ्रष्टाचार की परते खुलने लगी हैं। भ्रष्टाचार में सराबोर लेखपाल द्वारा अपने भाई और मुंशी के नाम पर अर्जित की गई भूमि रूपी अकूत सम्पत्ति की क्षेत्र में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है। लेखपाल ने काली कमाई की जोर पर ऊंचाहार में विभिन्न स्थानों से लेकर जगतपुर क्षेत्र तक भाई और मुंशी के नाम पर साम्राज्य स्थापित किया है। जांच की तलवार लटकी तो भाई तो छोड़िए महज उसके मुंशी के नाम पर करोड़ों की सम्पत्ति निकलेगी जिसका हिसाब किसी के पास नहीं है।
ऊंचाहार क्षेत्र में तैनात लेखपाल सिंह उपनाम ने अपने सगे भाई के नाम पर ऊंचाहार, कैथवल समेत कई अन्य स्थानों पर जबरन भूमि खरीदी है और अपने भाई के नाम से ही एक एक अंतर्जनपदीय सजातीय शख्स को बेंचकर सरकारी मानकों को तार तार किया है। बताते चलें कि क्षेत्र के निवासी मौर्य उपनाम नामक शख्स की भूमि को भी इस लेखपाल ने ब्लैक मेल करते हुए जबरन खरीद लिया और अब वह शख्स न उम्मीद है और सरकार से कार्यवाही की आस लगाई है।
मज़ेदार बात यह है कि जिस पाण्डेय उपनाम को इसने अपना मुंशी रखा है उसे यह वेतन के रूप में कुछ भी नहीं देता बल्कि क्षेत्र में की गई काली कमाई से ही उसका गुजारा करवाता है। इतना ही नहीं इसी पाण्डेय मुंशी से ही यह अवैध धन उगाही भी करवाता है। कार्यवाही के चाबुक का इसे जरा भी भय नहीं है क्यूं कि सूबे के मुखिया इसके सजातीय हैं इसलिए यह बेखौफ होकर धन उगाही और भ्रष्टाचार की घटनाओं को अंजाम देता है। यदि आला अधिकारियों ने इस गम्भीर मामले को संज्ञान लिया तो जांच की जद में लेखपाल व उसके भाई समेत मुंशी आयेगा। ख़बर प्रकाशित होने के बाद जांच की तलवार लटकने की उम्मीद लगभग तय है। जिस मुंशी का कोई दैनिक और मासिक समेत कोई वेतन भी वेतन नहीं उसके नाम करोड़ों की भूमि कहां से आई? यह लेखपाल जिस तहसील और हल्के में तैनात है वहां सगे भाई ने भूमि खरीद फरोख्त कैसे की और उसका बैनामा भी हो गया ऐसे कई बड़े सवाल हैं जिनका जवाब मिला तो कार्यवाही तय है। क्षेत्र के समाजसेवक व्यक्ति का कहना है कि इसकी शिकायत सोमवार को राजस्व परिषद लखनऊ से की जायेगी।









