
रमजान का अंतिम शुक्रवार जुमअतुल विदा की नमाज कस्बा व अतरिफ की मस्जिदों में अदा की गई।
सलोन रायबरेली। रमजान का अंतिम शुक्रवार जुमअतुल विदा की नमाज कस्बा व अतरिफ की मस्जिदों में अदा की गई। मस्जिद उस्मान खान ,तवक्कली ,कच्ची मस्जिद, दिलबर शाह ,मरकज मस्जिद ,मदीना मस्जिद, फातिमा मस्जिद पैगंबरपुर मस्जिद खान काह नईमिया करीमिया मस्जिद, मस्जिद मोहसिन शाहमीर खान, अतानगर आदि। इस अवसर पर नमाजियो को अपने संबोधन में मस्जिद उस्मान खान के इमाम व खतीब मौलाना सऊद अली खान ने कहा ,”रमजान का यह महीना कुरान के धरती पर नाजिल होनेका महीना है ।अतः ईश्वर से प्रेम का यह मौसम कुरान से जुड़कर ज्ञानात्मक संवेदना पैदा करता है ।रमजान कुरान उत्सव का महीना है। कुरान पढ़ कर तो देखिए कि कैसी विस्मयकारी किताब है ये। ज्ञानात्मक संवेदना और दार्शनिक सौंदर्य बोध से ओत प्रोत मानवता के नाम एक जीवंत संदेश है कुरान ।”येआशाओं उम्मीदों की ज्योति जगाने वाली किताब है ।कुरान खोलते ही पहले चैप्टर सूर: फातिहा का पहला शब्द है *अलहमदो लिल्लाह *जिसका अर्थ है शुक्र है अल्लाह का ।शुक्र यानी कृतज्ञता का जज्बा इंसान को नकारात्मक विचारो और भावनाओ से बचाता है और मन में आशाओं के दीप जलाता है ।वह दीप जिस से मानव जीवन मे दीप से दीप जलने की अनंत श्रृंखला शुरू हो जाती है । तो आइये इस महीने कुरान के अध्ययन की रोशनी में हम ईश्वर से मोहब्बत का चिराग रोशन करें। ऐसा चिराग जो अज्ञानता ,नफरत, और उन्माद के घाट टोप अंधियारे को दूर कर दे। रमजान प्रशिक्षण है शेष 11 महीनो के लिए ।जिस प्रकार हम रोजा रख कर बुरी बातों से रुक जाते हैं बाकी 11 महीनो में उसका अनुकरण करें ।अंत में नमाज के बाद मुल्क में आपसी भाईचारा और सौहार्द के वातावरण के सृजन और अमन चैन के लिए के लिए सभी ने ईश्वर से दुआ मांगी। इस अवसर पर निजामुद्दीन अंसारी, हाजी मोहम्मद अयूब खान ,अशरफ खान मेवाती, मुतवलली मस्जिद, मोहम्मद इस्माइल खान, मौलाना सलमान ,अली अहमद मिर्जा जमाल शाहिद भारी संख्या मे नमाजी मौजूद रहे। प्रशासन का सहयोग विशेष रहा।










