कानों के माध्यम से होकर सीधे हृदय तक उतर जाती है कविता
खुटार रामलीला में आयोजित कवि सम्मेलन में पधारे वयोवृद्ध गीतकार और नौटंकी विधा के मर्मज्ञ कवि बेनीराम “अंजान” कुशल मंच संचालक और बहुबिधा के कवि उर्मिलेश “सौमित्र”एटा से पधारे वरिष्ठ कवि और साहित्यकार बलराम “सरस” से हमारे संवाददाता ने वार्ता की। प्रस्तुत हैं वार्ता के कुछ अंश।
नौटंकी विधा के मर्मज्ञ विविध विधाओं पर अपनी पकड़ रखने वाले एक ऐसे वयोवृद्ध गीतकार और कवि बेनीराम अंजान कहते हैं कि आज मंचों के लिए चारों को मारा-मारी मची हुई है।कहीं गुटबाजी तो कहीं सियासत हावी है। कविता का काम सियासत की दासी बनकर रहना नहीं बल्कि उसे मार्ग प्रशस्त करना है। कविता के नाम पर जो हा हा हू हू चल रहा है वह कविता नहीं है असली कविता तो इससे आगे की चीज़ है।मानव मन की पीड़ा की अभिव्यक्ति ही कविता है। कविता राष्ट्र के रग रग में उत्साह का संचार करने वाली एक चिंगारी है। जिससे समूचा देश प्रभावित होता है। देश काल अनुरूप कविता और साहित्य का सृजन होना चाहिए। जिससे राष्ट्र जागरण अभियान सफल हो सके।
बेनी राम “अंजान” अपनी ग़ज़ल के माध्यम से कहते हैं कि
ऐ ताल के मछेरे, सोया तू बेखबर है ।
हर मीन अब यहाँ की, खुद बन गई मग़र हैं।
पनिहा,समझ के जिनको , बच्चे भी छेड़ते थे,
उनके भी पर जमे हैं, हर दाँत मे ज़हर है ।
हंसो के बीच मे है, बगुला विचित्र बैठा,
रखता निगाह पैनी , गिनता लहर लहर है ।।
कवि उर्मिलेश सौमित्र ने कविता को परिभाषित करते हुए कहा कि,”भावनाओं में उठता हुआ विचारों का अतिरेक कविता है सामाजिक विद्रूपताओं, विडंबनाओ और विषमताओं से जब कभी मन आहत होता है तो हृदय की प्रतिक्रिया के रूप में भावना के बोल कागज पर शब्द बनकर के बिखर जाते हैं।
कविता अभिव्यक्ति का ऐसा सशक्त माध्यम है जो कानों से होकर के सीधे हृदय में उतर जाती है ।
उन्होंने कहा कि
गुजारा हम नहीं करते कभी फेंके निबालों पर
भरोसा है हमें मेहनत भरे हाथों के छालों पर
हमारी मौत की मेयार तक ईमान बोलेगा
हमारी भूख भी भारी है रोटी के दलालों पर
तालिबे इल्म झुका सर सलाम करते हैं
जिन्हें तहजीब मयस्सर सलाम करते हैं
वो सिकंदर है इसी बात पे मगरूर हुए
यह वो दर है कि सिकंदर सलाम करते हैं।
एटा से पधारे कवि बलराम सरस ने कविता को परिभाषित करते हुए कुछ यूं कहा कि कविता समाज और राष्ट्र संस्कृति की उन्नति के लिए सतत् प्रयासरत रहती है।
कविता सतत् प्रयत्नशील रहती है, कविता देश का इतिहास गाती है ,समाज को नई दिशा देती है, और हौसला देती है।
उन्होंने ने कहा कि आदम दरिंदा हो गया है आज के परिवेश में,
लंकेश जिंदा हो गया है आज के परिवेश में,
बहेलियों ने कर लिया अनुबंध बाजू से यहां,
घायल परिंदा हो गया है आज के परिवेश में।









