
CRS AGENCY। यह सुनकर अच्छा लगा कि रूस ने भारत की दोस्ती की जमकर तारीफ की है। भारत और रूस का सहयोग हमेशा बराबर रहा है। दोनों देश विश्व प्रामुख्यता में एकदिवसीय हैं।यूक्रेन युद्ध के बीच पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की मार से कराह रहे रूस ने भारत के साथ दोस्ती की जमकर तारीफ की है। रूस के उप राजदूत रोमन बाबुश्किन ने कहा कि भारत और रूस के बीच सहयोग हमेशा बराबर का रहा है। भारत और रूस दोनों ही देश आज एक बहुध्रुवीय विश्व प्रणाली बनाना चाहते हैं जहां सभी के साथ बराबरी का और न्यायपूर्ण व्यवहार हो। दोनों देश ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र, एससीओ में एक दूसरे से समन्वय बनाए रखते हैं। एक दूसरे की चिंताओं और हितों को आवश्यक ध्यान देते हैं। हमारे संबंध दूसरे देशों के लिए उदाहरण जैसे बन सकते हैं। रूस की विदेश नीति में भारत प्राथमिक देशों में सबसे ऊंचा है। हमारी दोस्ती दुनिया में एक उदाहरण है।यह सच है कि भारत ने अभी तक रूस के यूक्रेन पर हमले की आलोचना नहीं की है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग के दौरान भी रूस के मुद्दे में अपने दोस्त का समर्थन किया है। रूसी अधिकारी ने कहा कि रूस के लिए भारत और चीन सबसे बड़े सहयोगी हैं। हमारी इच्छा है कि दोनों के बीच स्थायी सहयोग वापस आए। यूरेशिया में स्थिरता इस पर निर्भर है। हम इस पर जोर देते हैं कि भारत और चीन के बीच जो सीमा विवाद है, वह द्विपक्षीय मामला है। किसी दूसरे देश की तुलना में रूस इसका राजनीतिक लाभ नहीं उठाना चाहता है। हमें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ेगा।
भारत अमेरिका के बीच बढ़ते रिश्ते पर रोमन बाबुश्किन ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार महाशक्ति है और उसकी भारत की विदेश नीति बहुमुखी है। भारत और अमेरिका कई मोर्चों पर मिलकर काम करते हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है। वह किसी के दबाव में नहीं आता है। रूस भी इसी विदेश नीति का पालन करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत और रूस दोनों ही देश इस तरह के एकतरफा प्रतिबंधों को स्वीकार नहीं करते हैं।










