जमीनी राजनीति, सामाजिक, संस्कृतिक, किसान नेता के रूप में वर्तमान राजनीति के प्रेरणा स्रोत, माननीय पूर्व मंत्री सतपाल सिंह यादव।
तिलहर (उत्तर प्रदेश)। बाबू जी नाम से प्रसिद्ध, पूर्व मंत्री स्वर्गीय श्री सत्यपाल सिंह यादव, माननीय प्रधानमंत्री अटल वाजपेयी के समय भारत सरकार में 1998 से 1999 तक माननीय मंत्री रहे और खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय संभाला। श्री सत्यपाल सिंह यादव का लंबा राजनीतिक जीवन, स्थानीय स्तर पर, अपने क्षेत्र के लिए समर्पित रहा जिन्हें जमीनी और किसान नेता के रूप में कभी भुलाया नहीं जा सकता। 
श्री सत्यपाल सिंह, उत्तर प्रदेश के तिलहर निर्वाचन क्षेत्र से #पांच बार लगातार, विधायक रहे। भले ही उनके राजनीतिक दल अलग-अलग रहे हो परंतु उनके कार्य और मृदुल भाषा के चलते क्षेत्र की जनता ने उन्हें दिल से चाहा और बार-बार अपना प्रतिनिधि चुना। वे शाहजहाँपुर से #तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों की सूची में भी थे, लेकिन विधायक चुनाव केवल 137 वोटों से हार गए। उन्होंने शकुंतला यादव से विवाह किया और उनके 3 बच्चे हैं (2 बेटे, राजेश यादव और अमित यादव उर्फ रिंकू और 1 बेटी शशि प्रभा) हैं।
माननीय पूर्व मंत्री श्री सिंह का उनका जन्म 1 जुलाई 1942 में सिउरा गांव, श्री चेत राम सिंह यादव के घर हुआ था। सियरा उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुर की तहसील तिलहर क्षेत्र में है। लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए और एलएलएम की उपाधि प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद ही उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और 1974 में तिलहर सीट से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और फिर वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए। सत्यपाल सिंह ने अपनी इच्छा अनुसार राजनीतिक दल बदले और भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और जनता दल के सदस्य रहे। उनके मार्गदर्शक चौधरी चरण सिंह थे और फिर बाद में अजीत सिंह बने।
25 मई 1964 को श्रीमती शकुंतला यादव से विवाह किया। वे सिर्फ एक राजनेता के रूप में ही नहीं बल्कि कृषि विशेषज्ञ, वकील, राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी पहचाने जाते रहे। वर्तमान में बदलते स्वरूप की राजनीत में माननीय पूर्व मंत्री श्री सिंह, स्वर्गीय बाबूजी, युवा राजनीति के लिए आज भी प्रेरणा माने जाते हैं। उनके संबंध में मिली और अधिक जानकारी में वे 1974-89: उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे तो 1977-80 लोक लेखा समिति के भी सदस्य रहे। 1981-84: सार्वजनिक उपक्रम समिति का सदस्य बनाया गया और 1987-89: उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए। 1989 नौवीं लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्हें 1990 पर्यावरण सलाहकार समिति और रेलवे समिति, संचार मंत्रालय की सलाहकार समिति का भी सदस्य चुना गया।
19 मार्च 1998 से केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री रहे। उन्होंने अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियो में ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्कूलों को खोलना, बाढ़, आग, प्राकृतिक आपदाओं और पुलिस द्वारा किए गए अत्याचारों के पीड़ितों की सहायता को अपना कर्म समझा। उनके पसंदीदा शौक और मनोरंजनों में पढ़ना, बागवानी करना, संगीत सुनना, यात्रा करना और लोगों से मिलना, खेल और क्लब, योग और पैदल चलना शामिल रहा।
23 जुलाई 2004 को उनके निधन के पश्चात उनके बेटों ने राजनीति में प्रवेश किया। उनका बेटा समाजवादी पार्टी के टिकट पर तिलहर से पूर्व विधायक और परिसीमन के बाद कटरा से विधायक रहे। राजेश यादव ने 2007 और 2012 में शाहजहाँपुर जिले के कटरा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक का चुनाव जीता और अमित यादव उर्फ रिंकू ने पीलीभीत शाहजहाँपुर से एमएलसी का चुनाव जीता।
यहां यह भी समझना जरूरी है कि तिलहर विधान सभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1957 में UPSO (1956 परिसीमन आदेश) पारित के बाद हुआ था और 2008 में संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश पारित होने के बाद इस निर्वाचन क्षेत्र को पहचान संख्या 133 आवंटित की गई। 2008 के बाद तिलहर विधान सभा 133 हो गई जबकि पूर्व में कटरा इसी 133 तिलहर विधानसभा का हिस्सा रहा।










