
CRS NEWS:- Allahabad University में 24 दिन के बाद हिंसा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (University of Allahabad) में 10 जुलाई से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन 4 अगस्त को हिंसक झड़प में बदल गया। सीनेट गेट पर हुए इस घटनाक्रम ने कैंपस के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।
6,000 सीटों की बहाली: स्नातक (UG) और परास्नातक (PG) पाठ्यक्रमों से काटी गई 6,000 सीटों को पुनः शुरू करने की मांग।10% वार्षिक फीस वृद्धि का विरोध: ट्यूशन फीस में हर साल की जा रही 10 प्रतिशत बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग।
24/7 सेंट्रल लाइब्रेरी सुविधा: विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय को छात्रों के लिए 24 घंटे खुला रखने की मांग।
स्वास्थ्य व सांस्कृतिक सुविधाएँ: छात्रावासों (Hostels) में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए समर्पित स्थान का आवंटन।
छात्रों के अनुसार, सुरक्षा गार्डों के साथ हुई शुरुआती कहासुनी के बाद जब वे सीनेट गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, तब कुछ अज्ञात लोगों और कथित तौर पर प्रोफेसरों से जुड़े समर्थकों ने उन पर हमला कर दिया। इस हिंसा में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से कुछ को आईसीयू (ICU) में भर्ती करना पड़ा।
विश्वविद्यालय की पीआरओ (PRO) जया कपूर के अनुसार, प्रशासन को घटना के संबंध में किसी भी पक्ष से औपचारिक आपराधिक शिकायत नहीं मिली है। विश्वविद्यालय का रुख इस प्रकार है: आंदोलन में शामिल लोगों को “तथाकथित छात्र” बताते हुए उन पर शैक्षणिक माहौल खराब करने का आरोप लगाया गया है।
* कुलपति (VC) के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने और परिसर के काम में बाधा डालने वाले उपद्रवियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
* प्रतिबंधित व्यक्तियों को परिसर में प्रवेश करने से रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा गार्डों ने कार्रवाई की।छात्रों और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच गतिरोध कायम है। घायल छात्रों का आरोप है कि सार्वजनिक दबाव बनने के बाद ही पुलिस ने उनकी एमएलसी (Medico-Legal Case / MLC Report) दर्ज की। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय का कहना है कि लगातार जारी आंदोलनों की वजह से पठन-पाठन और प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।






