मदरसा नुरुल हुदा में मुशायरा एवं कवि सम्मेलन, शायरों ने बांधा समां।



शाहजहांपुर। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में मदरसा नुरुल हुदा, बिजलीपुरा में भव्य मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहर के प्रमुख शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के त्याग व बलिदान को याद किया। देशभक्ति, साहित्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ज्ञानेंद्र मोहन ‘ज्ञान’ ने की, जबकि मंच का संचालन मदरसा नुरुल हुदा के प्रधानाचार्य इकबाल हुसैन उर्फ फूल मियां ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी सरदार राजू बग्गा मौजूद रहे। मदरसा परिवार की ओर से अतिथियों और कवियों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नौजवान शायर फैजान आतिफ ने नाते पाक से किया। इसके बाद शायरों और कवियों ने एक-एक कर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। फरमान चिश्ती ने प्रेम की भावनाओं को शब्द देते हुए कहा, “दिखावे की न कर मुझसे मोहब्बत, मेरा दिल क्या खिलौना हो गया है।” उनकी पंक्तियों पर श्रोताओं ने जमकर दाद दी।
खलीक शौक ने अपनी गजल से महफिल में साहित्यिक रंग भरते हुए कहा, “लफ्जों के पैरहन से गजल को सजाकर, बज्म-ए-सुखन की नींद उड़ाई है इन दिनों।”
हास्य-व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध दिनेश रस्तोगी ने अपनी रचना के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनकी प्रस्तुति पर महफिल में ठहाके गूंज उठे।
कार्यक्रम अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मोहन ‘ज्ञान’ ने अपनी प्रभावशाली कविता के माध्यम से श्रोताओं में उत्साह और सकारात्मकता का संचार किया। उनकी पंक्तियां “पंख जले तो जल जाने दो, लौ के ऊपर नाचो तो। जीने का आनंद मिलेगा, ढाई आखर बांटो तो।” को श्रोताओं ने खूब सराहा और तालियों से स्वागत किया।
असगर यासिर ने संघर्ष और हौसले को केंद्र में रखते हुए कहा, “जरा-जरा में हवाओं के रुख बदलते हैं, कहां से लाए कोई हौसला उड़ानों का।” वहीं अजय अवस्थी ‘अनुरागी’ ने जोशीले अंदाज में अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, “तुम बढ़ाओ हाथ तो सारा जहां झुकने लगे, तुम उठाओ शीश तो ये आसमां झुकने लगे।” उनकी प्रस्तुति ने महफिल में जोश भर दिया।
फैसल फैज ने विरासत, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों पर व्यंग्य करते हुए कहा, “पुरखों से जो मिला है वही नाम बहुत है, कोठी में मरम्मत का काम बहुत है।”
मुशायरे में देशभक्ति और शहीदों के सम्मान के साथ सामाजिक विसंगतियों, रिश्तों, संघर्ष, प्रेम और जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को भी शायरों एवं कवियों ने अपने अलग-अलग अंदाज में प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि उन वीर शहीदों को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। साहित्य और कविता समाज में देशप्रेम, भाईचारे और एकता की भावना को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम हैं।
प्रधानाचार्य इकबाल हुसैन उर्फ फूल मियां ने सभी अतिथियों, शायरों, कवियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मदरसा नुरुल हुदा में शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में देशप्रेम, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने के लिए ऐसे कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाते रहेंगे।
कार्यक्रम के समापन पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।






