
17 अगस्त से सिविल कोर्ट परिसर में आंदोलन, भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं; समस्याओं के समाधान तक धरना जारी रखने का ऐलान
CRS NEWS रायबरेली। सिविल कोर्ट परिसर में न्यायिक अधिकारियों के कथित व्यवहार, कार्यप्रणाली और न्यायालय परिसर में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध तेज हो गया है। अधिवक्ताओं ने विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर 17 अगस्त 2026 से सिविल कोर्ट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। शुक्रवार, 21 अगस्त को भी करीब 11 बजे अधिवक्ता धरना स्थल पर मौजूद रहे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
धरने को लेकर परिसर में लगाए गए बैनर में न्यायिक अधिकारियों पर कथित भ्रष्टाचार, अधिवक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार और कोर्ट परिसर में व्याप्त अव्यवस्थाओं को प्रमुख मुद्दा बताया गया है। बैनर के माध्यम से अधिवक्ताओं से आंदोलन में सहयोग करने की अपील भी की गई है।
लंबे समय से असंतोष का दावा
धरना दे रहे अधिवक्ताओं का आरोप है कि सिविल कोर्ट के कुछ न्यायिक अधिकारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं में लंबे समय से असंतोष है। उनका कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, ऐसे में उनके साथ सम्मानजनक और सहयोगात्मक व्यवहार होना चाहिए। आरोप है कि कई मामलों में अधिवक्ताओं को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा है, जिससे असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कोर्ट में प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिवक्ता, वादकारी और अन्य लोग पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में मूलभूत व्यवस्थाओं का बेहतर होना जरूरी है। अव्यवस्थाओं के कारण न केवल अधिवक्ताओं बल्कि मुकदमों की पैरवी के लिए आने वाले वादकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उठी आवाज
आंदोलन के बैनर में कुछ न्यायिक अधिकारियों पर कथित भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में अभी कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए जिन मुद्दों को लेकर विरोध किया जा रहा है, उनकी गंभीरता से जांच और आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए।
17 अगस्त से जारी है धरना
अधिवक्ताओं के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 17 अगस्त से की गई है और इसे अनिश्चितकालीन रखा गया है। उनका कहना है कि जब तक संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर अधिवक्ताओं से एकजुट होकर आंदोलन में सहयोग करने की अपील की जा रही है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि उन समस्याओं की ओर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करना है, जिनका असर अधिवक्ताओं और वादकारियों दोनों पर पड़ रहा है। उनका दावा है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान किया जाए तो न्यायालय परिसर का वातावरण और अधिक बेहतर एवं व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
वादकारियों पर भी पड़ सकता है असर
सिविल कोर्ट में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आगे भी जारी रहने की स्थिति में न्यायिक कार्य और वादकारियों की दिनचर्या पर इसका असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बड़ी संख्या में लोग अपने मुकदमों की सुनवाई और पैरवी के लिए न्यायालय पहुंचते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के आंदोलन के चलते न्यायिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति में वादकारियों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ सकती है।
संबंधित पक्ष का जवाब आने पर साफ होगी स्थिति
फिलहाल अधिवक्ताओं की ओर से लगाए गए न्यायिक अधिकारियों के दुर्व्यवहार और कथित भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित न्यायिक अधिकारियों या सक्षम प्रशासनिक स्तर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अधिवक्ताओं का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित समाधान निकाला जाए। वहीं, अब निगाह इस बात पर है कि न्यायिक प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी अधिवक्ताओं के आंदोलन पर क्या रुख अपनाते हैं और दोनों पक्षों के बीच वार्ता के जरिए विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।






