
CRS NEWS लखनऊ। जेन जी छात्रों के आंदोलन के समर्थन और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में शनिवार को राजधानी लखनऊ में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता परिवर्तन चौक से राजभवन की ओर मार्च करते हुए निकले। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाई।
प्रदर्शन का नेतृत्व उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष दीपक शिवहरे ने किया। मार्च में पूर्व एमएलसी दीपक सिंह, जगदीश चंद्र जांगीड़ समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यकर्ताओं के हाथों में विभिन्न मांगों से संबंधित पोस्टर और बैनर थे।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ है। पार्टी ने छात्रों के साथ कथित अत्याचार और पुलिस कार्रवाई के विरोध में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि युवाओं की समस्याओं और उनके आंदोलन को दबाने के बजाय सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए।
राजभवन घेराव का किया था ऐलान
कांग्रेस की ओर से पहले ही राजभवन पहुंचकर घेराव करने का ऐलान किया गया था। इसी के तहत परिवर्तन चौक से कार्यकर्ताओं ने राजभवन की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। जैसे ही कार्यकर्ता आगे बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।
इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक लिया। कुछ देर तक मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही।
प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजा
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजा गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छात्रों के मुद्दे पर पार्टी सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने युवाओं के अधिकारों, छात्र हितों और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के अधिकार को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। पुलिस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास बताते हुए आगे भी आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए।







