- उन्नाव: गौशाला में तीन गौवंश मृत मिलने से मचा हड़कंप, चारा-पानी की व्यवस्था पर उठे सवाल
उन्नाव
संवादाता योगेश दीक्षित। जनपद उन्नाव के देवराकला क्षेत्र के सांभर गांव स्थित गौशाला में निरीक्षण के दौरान तीन गौवंश मृत अवस्था में मिलने से हड़कंप मच गया। मौके पर पहुँचे लोगों के अनुसार गौशाला में उस समय कोई केयरटेकर मौजूद नहीं था। कुछ देर बाद केयरटेकर के पहुँचने पर उसकी कथित नशे की हालत को लेकर भी सवाल खड़े किए गए।
निरीक्षण के दौरान गौशाला में गौवंशों के लिए पर्याप्त हरा चारा, चोकर और अन्य आवश्यक आहार उपलब्ध नहीं दिखाई देने का दावा किया गया। ऐसे में गौशाला में रह रहे गौवंशों की देखभाल और उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि गौशाला के संचालन से जुड़े जिम्मेदार व्यक्ति ननकऊ साहू, ग्राम प्रधान, नियमित रूप से मौके पर मौजूद नहीं रहते। निरीक्षण के दौरान जब मामले को लेकर सवाल-जवाब किए गए तो उनके पुत्रों के मौके पर पहुँचने और विवाद की स्थिति उत्पन्न होने की बात भी सामने आई।
तीन मृत गौवंशों ने खड़े किए कई सवाल
गौशाला में तीन गौवंशों का मृत मिलना पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू है। सवाल यह है कि इन गौवंशों की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई? क्या उन्हें समय पर भोजन और पानी मिल रहा था? क्या बीमार होने की स्थिति में पशु चिकित्सक की व्यवस्था की गई थी? और यदि गौशाला में सरकारी स्तर पर चारे एवं देखभाल के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, तो उनका वास्तविक उपयोग कहाँ और किस प्रकार हो रहा है?
स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच और मृत गौवंशों के पोस्टमार्टम की माँग उठ रही है, ताकि उनकी मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके।
सरकार की गौ संरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल
उत्तर प्रदेश में गौवंश संरक्षण को लेकर सरकार द्वारा लगातार योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। ऐसे में यदि किसी गौशाला में गौवंशों को पर्याप्त चारा-पानी और चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है, तो यह केवल एक गौशाला का मामला नहीं बल्कि निगरानी और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2022 से संचालित गौशाला में अब तक कितने गौवंश आए, कितने जीवित हैं और कितने की मृत्यु हुई—इसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहिए। साथ ही चारे की खरीद, वितरण, पशुओं की संख्या और सरकारी सहायता से संबंधित अभिलेखों की भी जाँच की जानी चाहिए।
एफआईआर की माँग, निष्पक्ष जाँच की अपील
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जाँच, मृत गौवंशों का पोस्टमार्टम तथा गौशाला के संचालन से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जाँच कराने की माँग की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गौशाला का उद्देश्य बेजुबान गौवंशों को सुरक्षित आश्रय और भोजन उपलब्ध कराना है। यदि वहीं पर गौवंशों की मौत होती है और उनकी देखभाल में लापरवाही के आरोप सामने आते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और जाँच के बाद तीनों गौवंशों की मौत तथा गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर सामने आए आरोपों की वास्तविकता क्या निकलकर सामने आती है।







