
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के लंका गेट के पास सड़कें बनीं जलाशय, राहगीरों और वाहन चालकों को हुई परेशानी
CRS NEWS वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लगातार करीब 16 से 18 घंटे हुई बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। लंबे समय तक हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। प्रमुख सड़कों और चौराहों से लेकर आवासीय क्षेत्रों तक बारिश का पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के लंका गेट के आसपास भी बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो गया। लंका गेट शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में शामिल है। यहां से रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, कर्मचारी, स्थानीय लोग और वाहन गुजरते हैं। जलभराव के कारण राहगीरों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा, जबकि दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
लंका गेट को वाराणसी की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी अहम माना जाता है। चुनावी दौर में राजनीतिक दलों और नेताओं की गतिविधियों का यह इलाका प्रमुख केंद्रों में रहता है। ऐसे में शहर के इस महत्वपूर्ण स्थान पर जलभराव ने नगर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार बारिश के चलते कई जगहों पर नालियां और नाले ओवरफ्लो होने की स्थिति में पहुंच गए। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर निगम से जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त कराने तथा जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल राहत कार्य शुरू करने की मांग की है।
बारिश के कारण शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। पानी भरी सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी होने से कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनी। वहीं, पैदल चलने वालों को सड़क किनारे जमा पानी और कीचड़ के कारण परेशानी उठानी पड़ी।
लगातार हुई बारिश के बाद लंका गेट का जलभराव वाराणसी की तस्वीर का एक छोटा सा नजारा है। शहर के अन्य हिस्सों में भी जलभराव की स्थिति ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर हैं कि बारिश का पानी निकालने और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।







