
CRS NEWS AGENCY:- मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिका द्वारा ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस बढ़ते टकराव से पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है।
संघर्ष का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है।
इस बीच रूस ने भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, 9 जुलाई को ईरान के गोलस्तान प्रांत में स्थित अक टेके खान रेलवे पुल पर कथित अमेरिकी क्रूज मिसाइल हमले की खबर ने तनाव को और बढ़ा दिया। यह पुल ईरान, रूस और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
फिलहाल दोनों देशों के आक्रामक रुख ने पूरे क्षेत्र को अनिश्चितता के दौर में ला खड़ा किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस संकट को टाल पाएगी या यह संघर्ष और व्यापक रूप लेगा।





