
CRS NEWS AGENCY :- Iran-Israel जंग के बीच ट्रंप को बहुत बड़ा झटका. वर्तमान में मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव ने न केवल वैश्विक राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की रणनीतियों के लिए भी गंभीर मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप प्रशासन को तीन मोर्चों पर भारी विफलता का सामना करना पड़ा है।
1. वित्तीय झटका: 175 अरब डॉलर का रिफंड
अमेरिकी व्यापार अदालत (US Trade Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए ‘अवैध’ टैरिफ को रद्द कर दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि लगभग 175 अरब डॉलर (₹16 लाख करोड़) का रिफंड उन व्यवसायों को वापस किया जाए जिनसे यह वसूला गया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन शुल्कों को पहले ही अमान्य घोषित किए जाने के बाद, यह निर्णय हजारों कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, लेकिन ट्रंप की आर्थिक साख के लिए यह एक बड़ा वित्तीय झटका है।
2. भारत-रूस तेल संबंध और व्यापार रणनीति की विफलता
ट्रंप ने लगातार भारत को रूस से दूर रखने और रूसी तेल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया था। हालांकि, उनकी यह रणनीति विफल होती दिख रही है। वर्तमान में, रूस लगभग 95 लाख बैरल कच्चा तेल भारतीय बंदरगाहों की ओर भेज रहा है। इससे न केवल भारत के तेल भंडार मजबूत हो रहे हैं, बल्कि यह ट्रंप की उस व्यापार नीति को भी खुली चुनौती है जो सहयोगियों को रूस से काटने की कोशिश कर रही थी।
3. स्पेन का साथ छोड़ने से सैन्य और कूटनीतिक संकट
सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब अमेरिका के पुराने सहयोगी स्पेन ने ईरान के खिलाफ संघर्ष में अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने से इनकार कर दिया।
सैन्य वापसी: इस फैसले के बाद अमेरिका को स्पेनिश ठिकानों से अपने 15 लड़ाकू विमान हटाने पड़े हैं।
पेड्रो सांचेज़ की खुली चुनौती: स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ट्रंप की व्यापारिक धमकियों को दरकिनार करते हुए “युद्ध को ना” (No to war) कहा है। उन्होंने हमलों को अवैध बताते हुए मानवीय आपदा की चेतावनी दी है।
बाजार पर असर: रिलायंस इंडस्ट्रीज को लाभ
मध्य पूर्व में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच, शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के शेयरों में भारी उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कमी के कारण रिफाइनिंग मार्जिन (Refining Margins) बढ़ने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों को मिल रहा है।










