
CRS NEWS:- राजस्थान के सरकारी स्कूलों की हालत और मीडिया पर पाबंदी।
जयपुर: राजस्थान सरकार ने हाल ही में एक नया फरमान जारी करते हुए सरकारी स्कूलों के परिसरों में मीडिया के प्रवेश, फोटोग्राफी और साक्षात्कार (इंटरव्यू) पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। हालांकि, इस प्रतिबंध के बीच सामने आई जमीनी हकीकत ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।
एक कमरे में सिमटा पूरा स्कूल
जयपुर के जवाहर नगर इलाके के एक सरकारी स्कूल से सामने आई स्थिति बेहद चिंताजनक है। यह स्कूल वर्तमान में महज एक कमरे से संचालित हो रहा है। वहीं, स्कूल के मूल कक्षा-कक्ष पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। वे बिना छत के ढहने की कगार पर हैं और उनका उपयोग केवल कबाड़घर या डंपिंग ग्राउंड के रूप में किया जा रहा है।
खतरे के साए में पढ़ाई
स्कूल तक पहुँचने का रास्ता और परिसर, विशेष रूप से बारिश के मौसम में, पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। इमारत की दीवारें दरक चुकी हैं और पलस्तर झड़ रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। इस खतरनाक माहौल में बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं।
संसाधनों और शिक्षकों का भारी अकाल
स्कूल में पहली से पाँचवीं कक्षा तक 150 से अधिक छात्र नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने और संभालने के लिए केवल दो शिक्षक ही तैनात हैं। इसके अलावा, स्कूल में क्रियाशील शौचालयों जैसी बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है, जिससे बच्चों को बेहद अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
सरकारी तंत्र पर सवाल और राजनीतिक घेराबंदी
इस जमीनी रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया पर लगाया गया यह प्रतिबंध राज्य के शिक्षा क्षेत्र में फैली प्रणालीगत विफलताओं और बदहाली को छुपाने का एक प्रयास नजर आता है। विपक्षी दलों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है और आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की योजना बनाई है।
84,000 कक्षाएँ जर्जर घोषित
यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है। उच्च न्यायालय में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे राजस्थान में लगभग 84,000 कक्षा-कक्ष जर्जर स्थिति में हैं और छात्रों के उपयोग के लिए बेहद असुरक्षित माने गए हैं।







