
CRS NEWS :- अगर जंग तो नेतन्याहु या फिर रेसेप तैय्यप एर्दोगन,कौन पड़ेगा भारी?सैन्य गतिरोध: देशों की सैन्य क्षमताओं का विस्तार से विश्लेषण करती है। जहाँ तुर्की विशाल थल सेना और मजबूत नौसेना परिसंपत्तियों के बल पर वैश्विक स्तर पर 9वीं सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में स्थान रखता है, वहीं इजराइल अपनी वायु सेना की श्रेष्ठता के कारण इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त बनाए हुए है। इजराइल का यह वर्चस्व मुख्य रूप से उसके 5वीं पीढ़ी के F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट्स के आधुनिक बेड़े पर निर्भर है।
राजनीतिक उद्देश्य: राजनीतिक विश्लेषकों और विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह बढ़ता सैन्य तनाव केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू राजनीति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इजराइल में आगामी चुनावों को देखते हुए, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को घटती जनप्रियता और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों का तर्क है कि देश में सुरक्षा संकट और तनाव की स्थिति को बनाए रखना उनके लिए एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, ताकि वे देश में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकें और अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रख सकें।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: सीरियाई क्षेत्र में हुए इस हवाई हमले की तुर्की ने कड़े शब्दों में आलोचना की है। तुर्की इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के सीधे उल्लंघन के रूप में देखता है। दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका ने खुद को इस पूरे सैन्य ऑपरेशन से दूर रखा है। सीरिया के लिए अमेरिकी विशेष राजदूत टॉम बैरक ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रकार की सैन्य वृद्धि और बयानबाजी क्षेत्र में केवल “अनावश्यक तनाव” को बढ़ावा दे रही है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता: यह रिपोर्ट न केवल तुर्की और इजराइल के संबंधों पर प्रकाश डालती है, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के क्षेत्र पर हुए हमलों के बाद UAE और ईरान के बीच गहराते तनाव का भी संक्षेप में उल्लेख करती है। ये घटनाक्रम यह दर्शाते हैं कि संपूर्ण मध्य पूर्व क्षेत्र एक बड़े और जटिल अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, जहाँ कई देश एक साथ विभिन्न क्षेत्रीय और सैन्य संघर्षों में उलझे हुए हैं।






