CRS NEWS AGENCY :- मध्य पूर्व में युद्ध के बादल अब और गहरे होते जा रहे हैं। हालिया घटनाक्रमों और सैन्य गतिविधियों ने यह संकेत दिया है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा वाकयुद्ध (War of words) अब एक वास्तविक जमीनी संघर्ष में बदल सकता है। आइए इस तनाव के मुख्य बिंदुओं पर नजर डालते हैं:
1. ईरान की ‘टांगें काटने’ वाली चेतावनी
IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड) के ‘खात अंबिया’ मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकारी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी बाहरी ताकत ने ईरान की सीमाओं का उल्लंघन करने या जमीनी हमला करने की कोशिश की, तो हमलावरों की “टांगें काट दी जाएंगी”। यह बयान ईरान के रक्षात्मक और आक्रामक संकल्प को दर्शाता है।
2. रूस और चेचन लड़ाकों की एंट्री
इस संघर्ष में सबसे चौंकाने वाला मोड़ रूस की संभावित भागीदारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करता है, तो रूस की कुख्यात चेचन यूनिट्स ईरान की मदद के लिए तैनात की जा सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह क्षेत्रीय जंग एक ‘विश्व युद्ध’ का रूप ले सकती है, जिसमें महाशक्तियां आमने-सामने होंगी।
3. ट्रंप की रणनीति और ईरान का अविश्वास
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे किसी भी सैन्य अभियान को 4 से 6 सप्ताह के भीतर समाप्त करने का लक्ष्य रखते हैं। हालांकि, तेहरान को इन बयानों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। ईरान का मानना है कि अमेरिका शांति का दिखावा कर रहा है, जबकि पर्दे के पीछे वह एक बड़े जमीनी हमले की साजिश रच रहा है।
4. सैन्य लामबंदी: ताबूत और जंगी जहाज
युद्ध की आहट तब और तेज हो गई जब अमेरिका ने USS Tripoli के जरिए 3,500 मरींस और नौसैनिकों की तैनाती की। इसके जवाब में ईरान के प्रमुख समाचार पत्र ‘तेहरान टाइम्स’ ने एक डरावनी हेडलाइन दी: “अमेरिकी सैनिक ताबूत में ही वापस लौटेंगे।” यह दिखाता है कि दोनों पक्ष अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
5. कूटनीतिक आरोप
ईरानी संसद के स्पीकर एमबी गालिबाफ ने अमेरिका की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि वाशिंगटन एक तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है और दूसरी तरफ गुप्त रूप से हमले की योजना बना रहा है।
निष्कर्ष:
वर्तमान स्थिति यह स्पष्ट करती है कि तनाव अब केवल बयानों तक सीमित नहीं है। विमानवाहक पोतों की तैनाती और परमाणु शक्तियों की जुबानी जंग ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहाँ एक छोटी सी गलती महाविनाश का कारण बन सकती है।









