
CRS NEWS AGENCY: Iran की बढ़ती सैन्य ताकत का राज़ क्या है आइए समझते हैं। आज की वैश्विक राजनीति में मिसाइल क्षमता किसी भी देश की सुरक्षा और दबदबे का पैमाना बन गई है। हालिया विश्लेषणों के अनुसार, दुनिया में केवल पाँच देश—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस—ऐसे हैं जिनके पास पूरी पृथ्वी के किसी भी कोने में हमला करने की क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलें (ICBM) मौजूद हैं। हालांकि, मध्य पूर्व (Middle East) में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, जहाँ ईरान एक बड़ी सैन्य शक्ति बनकर उभरा है।
ईरान का बढ़ता वर्चस्व और संघर्ष:
पिछले कुछ समय में ईरान ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चुनौती दी है। खाड़ी देशों में अमेरिकी दूतावासों और ऊर्जा केंद्रों पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने दुनिया का ध्यान ईरान की सैन्य क्षमता की ओर खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास मध्य पूर्व का सबसे बड़ा मिसाइल जखीरा है, जिसमें 3,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं।
मिसाइलों का वर्गीकरण और उनकी मारक क्षमता
ईरान की मिसाइल शक्ति को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
1. बैलिस्टिक मिसाइलें (Ballistic Missiles)
ये मिसाइलें रॉकेट संचालित होती हैं और एक तय प्रक्षेपवक्र (trajectory) का पालन करती हैं।
कम दूरी की मिसाइलें (SRBM): इनकी रेंज 300 किमी से 1,000 किमी तक होती है। मुख्य उदाहरण: शहाब-1, फतेह-110 और कयाम-1।
मध्यम दूरी की मिसाइलें (MRBM): 1,000 किमी से 3,000 किमी की मारक क्षमता वाली ये मिसाइलें इजरायल, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों को आसानी से निशाना बना सकती हैं। मुख्य उदाहरण: शहाब-3, इमाद और सेज्जिल।
2. क्रूज मिसाइलें (Cruise Missiles)
ये मिसाइलें कम ऊंचाई पर किसी हवाई जहाज की तरह उड़ती हैं, जिससे इन्हें रडार की पकड़ में लाना बेहद मुश्किल होता है। ये अपनी अचूक सटीकता के लिए जानी जाती हैं।
सतह पर हमला करने वाली: सूमार (2000 किमी), होवेयज़ेह (1350 किमी) और पावेह (1650 किमी)।
जहाज-रोधी (Anti-ship): समुद्री हमलों के लिए नूर, कादिर और अबू महदी जैसी मिसाइलें ईरान के पास हैं।
‘मिसाइल सिटीज’ और रणनीतिक सुरक्षा
ईरान ने अपनी सुरक्षा के लिए केवल मिसाइलें ही नहीं बनाईं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने के लिए कमानशाह (Kermanshah) और सेमनान (Semnan) जैसे प्रांतों में जमीन के नीचे विशाल “मिसाइल शहर” (Missile Cities) भी बनाए हैं। ये भूमिगत ठिकाने किसी भी विदेशी हमले से मिसाइलों को सुरक्षित रखने और वहीं से उन्हें लॉन्च करने की सुविधा देते हैं।










