
CRS NEWS :- Iran की नई list से कई देशों में हलचल। मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी प्रशासन ने एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ लिया है। ईरान में ईरान-समर्थित सशस्त्र समूहों के खिलाफ अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त सैन्य अभियानों के बाद बड़े पैमाने पर जवाबी हमले (Retaliatory Strike) की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तनाव कम करने (De-escalation) के संकेतों के बाद वर्तमान स्थिति में कुछ हद तक स्थिरता देखी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को निशाना बनाया जाता है, तो तेहरान ने पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) की प्रमुख तेल और गैस संपत्तियों को तबाह करने की एक विनाशकारी रणनीति तैयार की है। यदि यह योजना लागू होती है, तो विश्व स्तर पर एक गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।
Iran के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे पड़ोसी व क्षेत्रीय देशों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान की संप्रभुता के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य आक्रामकता का मुंहतोड़ और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।Iran के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) से जुड़ी ‘तस्नीम न्यूज़ एजेंसी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित संघर्ष की स्थिति में निम्नलिखित संवेदनशील ठिकाने ईरान के सीधे निशाने पर हो सकते हैं।
‘मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट’ के वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ रॉस हैरिसन (Ross Harrison) के अनुसार, वाशिंगटन की विदेश नीति काफी अनिश्चित और परिवर्तनशील दिखाई देती है। इतिहास गवाह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले भी सैन्य हमले के कड़े संकेत देकर अचानक कदम पीछे खींचे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से सुरक्षित व्यापार को लेकर कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं होता, तब तक इस क्षेत्र में अनिश्चितता और तनाव का माहौल कायम रहेगा।






