CRS NEWS:- मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर, प्रह्लाद जोशी बने देश के नए शिक्षा मंत्री।
नई दिल्ली। देश के शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे के बाद अब प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति भवन ने इस नई नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
क्या हैं मंत्रिमंडल फेरबदल के मुख्य बिंदु?
अतिरिक्त प्रभार: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों की जिम्मेदारियों का निर्वहन पहले की तरह ही करते रहेंगे। शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी उन्हें अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) के रूप में दी गई है।
तत्काल प्रभाव से इस्तीफा मंजूर: राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है।
क्या है इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की असल वजह?
केंद्र सरकार का यह बड़ा फैसला ऐसे संवेदनशील समय में आया है, जब पूरा देश NEET-UG परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर आंदोलित है। छात्रों और युवा संगठनों के लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच इस फेरबदल को सरकार की एक बड़ी रणनीतिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
जानिए कैसे भड़का था NEET विवाद (Timeline)
3 मई 2026: NEET-UG परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद देश भर में पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोप सामने आए। परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए अभ्यर्थियों ने सड़कों पर मोर्चा खोल दिया, जो देखते ही देखते राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन में बदल गया।
15 मई 2026: सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। सुनवाई के दौरान उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए एक शब्द पर विपक्ष और छात्रों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
CJI की बाद में आई सफाई: विवाद को गहराता देख बाद में यह स्पष्टीकरण सामने आया कि सीजेआई का वह तंज देश के युवाओं या परीक्षार्थियों के खिलाफ नहीं था, बल्कि उन जालसाजों और भू-माफियाओं के लिए था जो फर्जी तरीकों से शिक्षा व्यवस्था में सेंध लगाते हैं।
छात्रों के जारी आंदोलन और परीक्षा प्रणाली पर उठते सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय में हुआ यह नेतृत्व परिवर्तन यह संकेत देता है कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने और छात्रों के बीच अपना विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए कड़े कदम उठाने के मूड में है।





