
CRS NEWS AGENCY(Saharanpur News) :- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे पर सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कानून व्यवस्था और सामाजिक मर्यादा पर बहस छिड़ गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू रक्षा दल से जुड़ी दो महिलाओं को नेशनल हाईवे पर पेंट के साथ “यह सड़क मुसलमानों के लिए वर्जित है” लिखते हुए देखा गया। यह घटना सहारनपुर के बिहारीगढ़ क्षेत्र में स्थित डाट मंदिर के पास घटित हुई। सार्वजनिक संपत्ति पर इस तरह के भेदभावपूर्ण संदेश लिखने की क्रिया ने तुरंत ही व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है।
हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष, पिंकी चौधरी ने सार्वजनिक रूप से इस कृत्य की जिम्मेदारी ली है। अपने बचाव में उन्होंने कुछ बेहद विवादित तर्क दिए:
टैक्स पर सवाल: उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम समुदाय सड़कों और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए पर्याप्त टैक्स देता है?
मंदिर बनाम मस्जिद: चौधरी ने मंदिरों और मस्जिदों द्वारा सरकार को दिए जाने वाले वित्तीय योगदान के बीच तुलना करते हुए अपने कार्यों को न्यायोचित ठहराने की कोशिश की।
इस नफरत भरे कृत्य के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है:
FIR दर्ज: सहारनपुर के बिहारीगढ़ पुलिस स्टेशन में हिंदू रक्षा दल के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इसे ‘संविधान और मानवीय गरिमा पर हमला’ बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विवादास्पद इतिहास: यह पहली बार नहीं है जब यह संगठन चर्चा में है; यहां इनके विवादों से भरे पुराने इतिहास का भी उल्लेख किया गया है। भारत का संविधान अनुच्छेद 15 के तहत धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह की पाबंदी लगाने की कोशिश न केवल अवैध है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे के भी खिलाफ है।










