
CRS NEWS :- ईरान अमेरिका की जंग से मची दुनिया में हलचल।संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव: एक विस्तृत विश्लेषण
मध्य पूर्व में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति एक बेहद संवेदनशील और विस्फोटक मोड़ पर पहुँच चुकी है। हालिया वैश्विक रिपोर्टों और सैन्य गतिविधियों से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष संघर्ष अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है।
कूटनीतिक समझौतों का अंत
इस बढ़ते तनाव का सबसे पहला संकेत इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MOU) का समाप्त होना है। 17 जून को हस्ताक्षरित इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों को सीमित करना और कूटनीतिक संवाद के रास्ते खुले रखना था। हालांकि, जुलाई की शुरुआत से शुरू हुई भीषण सैन्य शत्रुता और लगातार होते बयानों के बाद यह समझौता 17 अगस्त को आधिकारिक रूप से निष्प्रभावी हो गया। इसके समाप्त होने से कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य: रणनीतिक नियंत्रण का विवाद
वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz), इस संघर्ष का केंद्र बिंदु बना हुआ है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इस क्षेत्र में पूर्ण अमेरिकी वर्चस्व के दावों के विपरीत, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। विशेषज्ञों का स्पष्ट तर्क है कि वर्तमान में ईरानी नौसेना के प्राधिकरण या अनुमति के बिना कोई भी व्यावसायिक या सैन्य पोत इस जलडमरूमध्य से नहीं गुजर सकता। 14 अगस्त को हुई घटना ने इस दावे को और बल दिया, जब ईरान ने यूएई की तेल कंपनी ADNOC के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
ईरानी सैन्य नेतृत्व ने भी अब किसी भी तरह के संयम को दरकिनार कर दिया है। ईरानी सेना के प्रमुख, अमीर हतामी ने हाल ही में एक सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी में उन्होंने अमेरिकी सशस्त्र बलों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का आह्वान करते हुए, अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने या उन्हें बेअसर करने वालों के लिए बड़े वित्तीय इनामों की घोषणा की है। इस तरह के खुले और आक्रामक बयान दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव की संभावना को और अधिक बढ़ा देते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच यह बढ़ता तनाव किसी अकेली घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि यह वर्तमान में जारी वैश्विक अस्थिरता से गहराई से जुड़ा हुआ है। एक तरफ जहां पूर्वी यूरोप में रूस द्वारा पोलैंड जैसे नाटो (NATO) सदस्य देशों को निशाना बनाए जाने की आशंकाएं बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ गाजा और लेबनान में इजरायल की लगातार जारी सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे मध्य पूर्व को युद्ध की आग में झोंक रखा है। यह बहुआयामी वैश्विक संकट दुनिया को एक व्यापक और अप्रत्याशित क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध की ओर ढकेल रहा है।







