
CRS NEWS : इस्लामाबाद/काबुल। कभी एक-दूसरे के करीबी माने जाने वाले पाक–तालिबान(पाकिस्तान और तालिबान) के रिश्ते अब गंभीर टकराव में बदलते दिख रहे हैं। सीमा पर लगातार बढ़ते तनाव के बीच हाल ही में हवाई हमलों और भारी झड़पों ने हालात को और बिगाड़ दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने स्थिति को ‘खुली जंग’ जैसे हालात करार दिया है।
पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार रात अफगानिस्तान के कई बड़े शहरों में हवाई हमले किए गए, जिनमें तालिबान के सैन्य ठिकानों, मुख्यालयों और हथियार डिपो को निशाना बनाया गया। काबुल प्रशासन ने भी हमलों की पुष्टि की है। यह कार्रवाई कथित तौर पर उस सीमा हमले के जवाब में की गई, जिसमें अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तानी सीमा बलों को निशाना बनाया गया था। दोनों पक्षों ने भारी नुकसान का दावा किया है।लेकिन समय के साथ रिश्तों में दरार गहराती चली गई। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी धरती पर हमले करने वाले आतंकी समूहों को अफगानिस्तान में पनाह मिल रही है, जिसे तालिबान रोकने में नाकाम रहा है।
क्यों बढ़ा तनाव?
इस्लामाबाद का कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के नेता और लड़ाके अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाने बनाए हुए हैं। साथ ही बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी समूहों को भी वहां से समर्थन मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं। 2022 के बाद से TTP और बलूच विद्रोहियों के हमलों में तेज़ी आई है।
पिछले सप्ताह पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कथित आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इससे पहले अक्टूबर में सीमा झड़पों में दर्जनों सैनिकों की मौत हुई थी। तुर्किये, कतर और सऊदी अरब की मध्यस्थता से एक अस्थायी युद्धविराम जरूर हुआ, लेकिन वह ज्यादा समय तक नहीं टिक सका।
ताजा झड़प की वजह
पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि हाल के आत्मघाती हमलों और सैन्य ठिकानों पर हमलों के पीछे अफगानिस्तान में बैठे आतंकी नेटवर्क का हाथ है। सूत्रों के मुताबिक, 2024 के अंत से अब तक कम से कम सात हमले या साजिशें सीधे अफगानिस्तान से जुड़ी पाई गई हैं।
समर्थक से टकराव तक की कहानी
1990 के दशक में पाकिस्तान को अफगान तालिबान का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता था। उस दौर में इस्लामाबाद ने अफगान तालिबान के उभार में अहम भूमिका निभाई थी। 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने पर भी पाकिस्तान ने खुलकर स्वागत किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने तब कहा था कि “अफगानों ने गुलामी की जंजीरें तोड़ दी हैं।”
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। पाकिस्तान अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है, जबकि काबुल की ओर से सीमा चौकियों पर जवाबी हमले की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यह टकराव सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।










