
CRS NEWS रायबरेली। योगाचार्य मनीष कुमार श्रीवास्तव जो कि राष्ट्रीय योग प्रशिक्षक होने के साथ डी ए वी पब्लिक स्कूल एन टी पी सी ऊंचाहार में शारीरिक शिक्षा के प्रवक्ता हैं। उन्हें योग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा योग रत्न सम्मान से नवाज़ा गया है लिसके अलावा उन्हें अनेक पुरस्कार प्राप्त हैं। उन्होंने राष्ट्रीय खेल संस्थान से एन आई एस से कोर्स के साथ साथ योग विज्ञान में परा स्नातक उपाधि भी ली है। योगाचार्य मनीष जी ने 21 जून और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 21 जून केवल वर्ष का सबसे लंबा दिन (उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म अयनांत) ही नहीं, बल्कि मानव जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन और आत्म-जागरण का संदेश देने वाला एक विशेष दिन भी है। इसी कारण इस तिथि को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में चुना गया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन की वास्तविक समृद्धि केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवनशैली में निहित है।

योग भारत की प्राचीन संस्कृति और ऋषि परंपरा की अमूल्य धरोहर है। हजारों वर्षों पहले हमारे ऋषि-मुनियों ने योग के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का मार्ग बताया। आज वही योग विश्वभर में करोड़ों लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह भारत के लिए गर्व का विषय है कि उसकी सांस्कृतिक विरासत आज पूरी मानवता के कल्याण का माध्यम बनी है।
21 जून का वैज्ञानिक महत्व भी अत्यंत विशेष है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जो ऊर्जा, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भारतीय परंपरा में भी यह समय आध्यात्मिक साधना और आत्म-विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए इस दिन योग दिवस मनाने का निर्णय केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी सार्थक है।
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव, चिंता, अवसाद, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन-दर्शन है। नियमित योगाभ्यास शरीर को स्वस्थ, मन को शांत, विचारों को सकारात्मक और जीवन को अनुशासित बनाता है। यह व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है और समाज में सद्भाव तथा सहयोग की भावना विकसित करता है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का वास्तविक उद्देश्य केवल एक दिन सामूहिक योग करना नहीं, बल्कि योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय योग और प्राणायाम के लिए निकाले, तो न केवल उसका जीवन बेहतर होगा, बल्कि एक स्वस्थ, जागरूक और सशक्त राष्ट्र का निर्माण भी संभव होगा।
आज, जब पूरा विश्व शांति, स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन की खोज में है, तब योग एक सार्वभौमिक समाधान बनकर उभरा है। यह भारत की उस महान परंपरा का प्रतीक है जो संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है।
आइए, इस 21 जून पर हम केवल योग दिवस न मनाएँ, बल्कि योग को अपने जीवन का स्थायी संस्कार बनाएँ। क्योंकि—
“योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, शांत मन और श्रेष्ठ मानवता की ओर बढ़ाया गया सबसे सशक्त कदम है।”










