पत्रकारिता के क्षेत्र में बढ़ती भीड़ ही तो नही पत्रकारो की समस्याएं!
(CRS इमरान साग़र की क़लम से)
शाहजहाँपुर-पत्रकारो की समस्याओं से निपटने के लिए, समय समय पर प्रशासन और पत्रकार संगठनो ने भले ही कितने ही वादे करते हुए हाथ पैर फेक लिए हो परन्तु, पत्रकारो की समस्याएं आज तक जस की ही नज़र आ रही हैं!
पत्रकारो की समस्याओं के लिए भले ही कुछ न हो सका हो लेकिन संगठन के मुखिया और प्रशासन के बीच का समन्व्य, अपने निज फायदे के लिए जरुर बरकरार नज़र आता रहा वहीं इतना सब निगेटिव होने के बाद भी पत्रकारो की फहरिस्त लगातार लम्बी होती जा रही हैं!
बढ़ती पत्रकारो की भीड़ सगंठन के मुखियाओं को सासं तक नही लेने दे रही है क्यूंकि जहाँ पत्रकारो की एक आध समस्या निस्तारण में सगंठनो को लोहे के चने चबाने पड़ रहे थे तो वहीं लगातार बढ़ती पत्रकारो की भीड, पत्रकारिता के लिए एक बड़ी समस्या बन कर उभर रही है क्यूंकि इस डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर लगी पत्रकारिता, समाज को खबर का सही और गलत का फैसला करने में समस्याएं उत्पन्न कर रही है!
ग्रामीण क्षेत्रो से लेकर, नगर व शहर के तमाम जनहित मुद्दे जहाँ प्रिंट और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया से गायब रहते हैं तो वहीं सोशल मीडिया के तथा कथित पत्रकारो द्वारा अबैध धन उगाही की शिकायते भी बड़ी समस्या बन कर सामने आ रही हैं जो कि पत्रकार संगठनो के लिए ही नही बल्कि प्रशासन और शासन के लिए भी एक बड़ी समस्या बन कर सामने आई हैं! एैसे में प्रशासन और संगठन यह तय कर पाने भी लोहे के चने चबा रहे हैं कि आखिर पत्रकारिता में हो रही तमाम समस्याओं का कैसे निस्तारण किया और कराया जाय!
एक ओर पत्रकारो की तमाम समस्या से निपटने के लिए पत्रकार संगठन अपनी पूरी ताकत लगाने में दिन रात एक करते नज़र आते हैं तो वहीं, रेत और मिट्टी का अबैध खनन, लकड़ी का अबैध कटान की कबरेज करते हुए पत्रकारो पर, अबैध धन बसूली, रंगादारी और दबंगई जैसे आरोप, सगंठनो के लिए नई समस्या खड़ी कर रहे हैं! साक्षर और निरंक्षर से अनप्रमाणित व्यक्तित्वो का हालांकि लेखनी से दूर दूर तक का रिश्ता नही हो सकता परन्तु पत्रकारिता के क्षेत्र में इनके बढ़ने से समस्याएं घटी नही बल्कि और बढ रही हैं!
पत्रकारिता के क्षेत्र में पत्रकारो के साथ बढ़ती समस्याओं से निपटने के लिए, पत्रकार सगंठनो को अब और भी मजबती के साथ, समस्याओं से निपटने के साथ ही स्थानीय और ग्रामीण पत्रकारिता को जागरुक करने जरुरत काफी जरुरत है क्यूंकि सोशल मीडिया के दौर में सबसे पहले स्वंय की टीआरपी बढ़ाने में खबर लेखन से पूर्व बिना प्रमाणित फोटो पोस्ट करने की प्रथा बन्द करनी होगी, पत्रकारिता के सुधार में तब इसे एक कोशिश ही कहा जा सकता है!









