
CRS NEWS रायबरेली: हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कड़ी टक्कर के बावजूद जीत का परचम लहराया, जो पार्टी के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। पिछले दस वर्षों से सत्ता में रहते हुए भी बीजेपी ने कांग्रेस के मुकाबले 40% वोट शेयर हासिल किया, जबकि कांग्रेस 39.1% पर रही। विपक्षी दलों में मतों के विभाजन का सीधा फायदा बीजेपी को हुआ, खासकर असंध, पुंडरी, अंबाला कैंट जैसी सीटों पर।
सधी हुई रणनीति और वोकल फॉर लोकल
बीजेपी ने इस बार एक बहुत ही सधी हुई रणनीति के तहत चुनाव में प्रवेश किया। पार्टी ने स्थानीय मुद्दों पर जोर देते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ के नारे को प्रमुखता दी। भ्रष्टाचार मुक्त सरकार, रोजगार के अवसर, और किसानों के लिए लाभप्रद योजनाएं इसके प्रचार के मुख्य बिंदु रहे। इसके साथ ही पार्टी की पारदर्शी रोजगार नीतियों को भी जनता से समर्थन मिला।
RSS की अहम भूमिका
बीजेपी की जीत में RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। चुनाव के दौरान आरएसएस ने जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए काम किया, खासकर ग्रामीण इलाकों में। इसने बीजेपी को उस वक्त समर्थन दिया जब पार्टी को इसकी सबसे अधिक आवश्यकता थी।
कांग्रेस की गलतियां और बीजेपी का फायदा
कांग्रेस के नेताओं का अतिआत्मविश्वास भी बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुआ। पार्टी के प्रमुख नेता प्रचार के बजाय दिल्ली में मुख्यमंत्री पद के लिए लॉबिंग में व्यस्त रहे, जिससे जमीनी स्तर पर कमजोर प्रचार हुआ। राहुल गांधी की सीमित जनसभाओं और प्रियंका गांधी की छोटी उपस्थिति ने भी कांग्रेस के कमजोर प्रचार को उजागर किया।
इसके अलावा, कांग्रेस की अंदरूनी कलह और आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन न हो पाने से भी बीजेपी को फायदा मिला।
गैर-जाट वोटर्स पर बीजेपी का फोकस
बीजेपी ने इस बार चुनाव में गैर-जाट समुदायों पर विशेष ध्यान दिया, जो उसकी जीत का महत्वपूर्ण कारक बना। जबकि कांग्रेस जाट वोटर्स पर फोकस कर रही थी, बीजेपी ने ओबीसी, ब्राह्मण, पंजाबी और अन्य ऊंची जातियों के मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित किया। इस बार दलित वोट भी बंटे हुए नजर आए, जिनमें से बड़ी संख्या में वोट बीजेपी के खाते में गए।
राम रहीम और सैनी फैक्टर का लाभ
चुनाव से कुछ दिन पहले राम रहीम को पैरोल दिए जाने से भी बीजेपी को लाभ मिला। इसके अलावा, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बजाय नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश करना भी पार्टी के लिए फायदेमंद रहा।
इन सभी रणनीतिक कारकों ने मिलकर बीजेपी को हरियाणा में तीसरी बार जीत दर्ज करने में मदद की, जिससे पार्टी का मनोबल ऊंचा हुआ।









