
CRS NEWS :- क्या गन्ने से एथेनॉल बनाया जा रहा हैं, इसलिए मेहगी हुई चीनी? भर में चीनी की कीमतों में हाल ही में हुई भारी वृद्धि का विश्लेषण करती है। हाल के महीनों में चीनी के दाम लगभग 40% तक बढ़ गए हैं, और कुछ क्षेत्रों में यह करीब ₹70 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। कीमतों में इस उछाल ने एक बड़ी राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है, जहां विपक्षी दल सरकार की ‘E20 एथेनॉल-ब्लेंडिंग’ नीति की आलोचना कर रहे हैं ।
* सरकार का रुख: केंद्र सरकार ने इस बात से इनकार किया है कि एथेनॉल उत्पादन ही मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण है। खाद्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों ने कहा कि कुल एथेनॉल का केवल एक चौथाई हिस्सा ही गन्ने से बनता है, जबकि बाकी का उत्पादन मक्के जैसे अनाजों से होता है। आपूर्ति को संतुलित करने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्चे चीनी के शुल्क-मुक्त आयात (duty-free import) को मंजूरी दी है।
* राजनीतिक आलोचना: कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं सहित विपक्षी दलों का तर्क है कि ईंधन के लिए गन्ने का इस्तेमाल करने से चीनी की कमी पैदा हो रही है, जिसके चलते त्योहारों के मौसम से ठीक पहले खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ रहे है।
* ग्राउंड रियलिटी (ज़मीनी हकीकत): खुदरा बाजारों और किराना दुकानों की पड़ताल से पता चलता है कि हालांकि चीनी और गुड़ की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन आलू और टमाटर जैसी अन्य जरूरी चीजों के दाम अपेक्षाकृत स्थिर हैं या उनमें केवल मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया है।
* व्यापक आर्थिक संदर्भ: अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस महंगाई के पीछे कई कारण हैं, जिनमें वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (जैसे अमेरिका-ईरान संघर्ष), अल नीनो का प्रभाव और अनिश्चित मौसम (जैसे बाढ़ और सूखा) शामिल हैं, जिससे दुनिया भर में कृषि उपज प्रभावित हुई है (।







