प्रकृति के फैसला, मौसम की मार गेहूं की फसल हुई बीमार, किसान सहित व्यापार को भी भारी नुकसान।
शाहजहांपुर/तिलहर। मंडी में इस बार गेहूं की आवक विगत वर्ष के मुकाबले 50 फीसद भी दिखाई नहीं पड़ रही है और जो गेहूं आ भी रहा है तो वो ऐसा जैसे गेहूं न हो कर दलिया हो। दरअसल मार्च माह में हवा से सूखा गेहूं की फसल तब सुख गई जब उसकी बाली में गेहूं का दाना बनने के लिए दूध बनता है और वहीं दूध सूख कर गेहूं जैसा हो गया। दूसरी बात ये कि इससे किसान का नुकसान यह हुआ कि जहां उसके खेत में 4 कुंतल तक गेहूं पैदा होना चाहिए था वहीं पैदावार 2 से ढाई कुंतल ही रह गई। मंडी के व्यापारी का इससे यह नुकसान हुआ कि उसकी मांग की जरूरत के अनुसार न तो गेहूं और न ही गेहूं की कुवालिटी उसे मिल पा रही है।


कल अचानक तिलहर स्थित नवीन गल्ला मंडी अपने एक मित्र से मिलने पहुंचा। घुसने से पहले समझ रहा था कि बाइक बाहर ही छोड़नी पड़ेगी क्योंकि गेहूं व धान के सीजन में मंडी में घुसना आसान नहीं होता। लेकिन कल ऐसा नहीं हुआ। बाइक सीधी मंडी के अंदर मित्र की आड़़त तक आसानी से पहुंच गई। वहां और आस पास एक आध ही गेहूं की ट्रॉली नजर आई। पास की आड़़त ट्रॉली से उतरते गेहूं पर नजर पड़ी तो समझा कि खराब गेहूं होगा जो कि किसान मंडी लाया होगा लेकिन नहीं, मंडी में लगे कई गेहूं के ढे़रो में डालकर देखने पर पता चला कि लगभग सारे गेहूं की ऐसी ही सूखी हुई हालत है।
बात करते करते इस साल हुई गेहूं की फसल का सारा राज सामने आ गया। बात चीत के दौरान पता चला कि मार्च के महीने में सर्द मौसम और ठंडी तेज हवाओ के चलते गेहूं की वो बालियां, जिनमें सिर्फ दूध ही पड़ पाया था सूख गई और अचानक निकली तेज धूप ने पूरी फसल को पीला और काटने लायक कर दिया। अब यदि कटान न होता तो ये चलने वाली तेज हवा गेहूं की बालियों को खेत में ही खाली कर देती।
इससे होने वाले नुकसान के संबंध में बताया गया कि जिस खेत में 4 कुंतल पार्टी बीघा हुआ करता था, उसमें 2 से ढाई कुंतल ही वजन रह गया। किसान को जितना और कुवालिटी का गेहूं मिलना चाहिए था वो नहीं मिला और व्यापारी जितनी आवक की उम्मीद लगाए बैठे थे उन्हें उनकी मांग के अनुसार नहीं मिल सका। यानी इस साल गेहूं के मामले में दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं उधर प्रशासन ने गेहूं की सरकारी खरीद के जितने बेहतर इंजन किए हुए थे वे भी धराशाई होते नजर आ रहे है।
प्रकृति के नियमों के उल्लंघन में आसमान की बदलती फिजा फसलों पर हर वर्ष देखने को मिल जाती है कि हरि फसल देख कर जहां किसान और व्यापार खुश नजर आता है तो वहीं, खेत से निकलते से पूर्व ही वो, भारी बारिश, आसमानी बर्फ (ओला) या फिर आंधियों का शिकार हो जाती है। इस सब के बहाने से प्रकृति हमे वार बार कुछ समझने और बताने का प्रयास करती होगी परंतु हम उसे समझने का रत्ती भर प्रयास नहीं करते।










