CRS NEWS :- रामपुर (JAUHAR UNIVERSITY): रामपुर स्थित प्रसिद्ध मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मुरादाबाद मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) की कोर्ट ने यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण (Demolition Order) के फैसले पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगा दी है। इस फैसले के बाद बीते 10 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन को बड़ी राहत मिली है।

🏛️ कानूनी मोर्चे पर क्या मिला अपडेट?
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर की 40 में से 38 इमारतों को अवैध बताते हुए उन्हें गिराने का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपील दायर की थी।
कोर्ट का रुख: मुरादाबाद मंडलायुक्त कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश पर अंतरिम स्टे दे दिया है।
मैनेजमेंट का पक्ष: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की पत्नी और पूर्व सांसद डॉ. तंजीम फातिमा ने इस फैसले को पहली सफलता करार दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानूनी लड़ाई अभी जारी है और यह केवल एक अस्थायी राहत है।
🏗️ मुख्य विवाद क्या है? (RDA vs जौहर यूनिवर्सिटी)
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह निर्माण की अनुमति और क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) से जुड़ी है:
RDA का आरोप: रामपुर विकास प्राधिकरण का दावा है कि परिसर की 38 इमारतों का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे (Approved Maps) के किया गया है।
विश्वविद्यालय का तर्क: यूनिवर्सिटी प्रबंधन का कहना है कि जब इन इमारतों का निर्माण कराया गया था, तब यह पूरा क्षेत्र RDA के क्षेत्राधिकार (Delineated Zone) में आता ही नहीं था। इसलिए नक्शा पास कराने की बाध्यता नहीं थी।
🎓 छात्र प्रदर्शन और राजनीतिक हलचल
- छात्रों की मांग: स्टे ऑर्डर की खबर मिलते ही पिछले 10 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों ने राहत की सांस ली और जश्न मनाया। हालांकि, छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग अंतरिम रोक नहीं, बल्कि डिमोलिशन ऑर्डर की पूरी तरह से वापसी है। इस मुद्दे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी तूल पकड़ लिया है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय जैसे दिग्गज नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। नेताओं ने कैंपस का दौरा कर छात्रों का समर्थन किया और राज्य सरकार से शैक्षणिक संस्थान के भविष्य की रक्षा करने की अपील की।






