
बिना सुरक्षा उपकरण के मजदूरों से कराया जा रहा काम, हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
CRS NEWS रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित 24 अगस्त के दौरे को लेकर जिले में प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। सड़कों की मरम्मत, साफ-सफाई और विभिन्न व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में विभागीय अधिकारी जुटे हुए हैं। इसी बीच बिजली विभाग से जुड़ी एक तस्वीर ने सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि बिजली से संबंधित कार्यों के दौरान मजदूरों से बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है। मौके पर काम कर रहे श्रमिकों के पास सुरक्षा हेलमेट, दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट और अन्य जरूरी उपकरणों की कमी नजर आने की बात सामने आई है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि विद्युत कार्य जैसे जोखिम भरे काम में यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है और कोई दुर्घटना हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
हादसे की स्थिति में कौन लेगा जिम्मेदारी?
बिजली के खंभों, तारों और विद्युत उपकरणों के आसपास काम करना बेहद जोखिम भरा माना जाता है। ऐसे कार्यों में मामूली लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। बावजूद इसके यदि मजदूरों से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए बिना काम कराया जा रहा है तो यह विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासनिक अमला जहां छोटी-छोटी कमियों को दूर करने में जुटा है, वहीं श्रमिकों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जानी चाहिए। दौरे की तैयारियां जरूरी हैं, लेकिन किसी कर्मचारी या मजदूर की जान जोखिम में डालकर नहीं।
अधिकारियों की निगरानी पर भी उठे सवाल
मौके पर काम कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। विद्युत कार्यों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि क्या मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं और यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
लोगों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि बिजली विभाग से जुड़े सभी कार्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही कराए जाएं। साथ ही बिना सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे श्रमिकों को तत्काल आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सुरक्षा व्यवस्था भी हो प्राथमिकता
मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को लेकर प्रशासन की सक्रियता साफ दिखाई दे रही है। ऐसे में आम लोगों के साथ-साथ उन मजदूरों और कर्मचारियों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, जो तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
अब देखना यह होगा कि बिजली विभाग और जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर सुरक्षा मानकों की जांच कराते हैं या फिर किसी हादसे के बाद ही जिम्मेदारी तय करने की कवायद शुरू होगी। फिलहाल बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कराए जाने की तस्वीरें विभागीय कार्यप्रणाली और श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।






