
हरदोई कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर हरदोई जिले के एकमात्र कारगिल शहीद आबिद खां को देशभर में याद किया गया। हालांकि, उनके पैतृक कस्बे पाली में इस बार प्रशासनिक अधिकारियों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। वर्षों से नगर पंचायत द्वारा आयोजित होने वाला श्रद्धांजलि कार्यक्रम इस बार नहीं हुआ और न ही कोई प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी शहीद की मजार पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचा।
पाली निवासी किसान गफ्फार खां और नत्थन बेगम के पुत्र शहीद आबिद खां ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में टाइगर हिल पर अदम्य साहस का परिचय दिया था। उन्होंने युद्ध के दौरान 17 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया था। 1 जुलाई 1999 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनकी शहादत आज भी पूरे हरदोई जिले के लिए गर्व का विषय है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले वर्षों में कारगिल विजय दिवस पर प्रशासन, पुलिस और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में नगर पंचायत द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता था। गत वर्ष तत्कालीन एसडीएम अरुणिमा श्रीवास्तव, नगर पंचायत पाली के अधिशासी अधिकारी कृष्ण कुमार सोनकर और थानाध्यक्ष सहित कई अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने शहीद की मजार पर पुष्प अर्पित किए थे। लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। हालांकि, कुछ देर बाद समाजवादी पार्टी सैनिक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पूर्व जिला उपाध्यक्ष रहमत अली मोनू के नेतृत्व में शहीद आबिद खां की मजार पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को नमन किया।
इस संबंध में जब एसडीएम एवं नगर पंचायत पाली के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी अंकित तिवारी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि वह कार्यालयीय कार्य से बाहर थे और उन्हें कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। वहीं, नगर पंचायत के अन्य कर्मचारियों ने भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया। रहमत अली मोनू ने कारगिल विजय दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।






