Ayodhya Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नई SIT का गठन। CCTV फुटेज और साक्ष्यों की होगी फोरेंसिक जांच। ट्रस्ट पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल जारी।

CRS NEWS: अयोध्या विश्व प्रसिद्ध श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Sri Ram Janmabhoomi Temple) में चढ़ावे की राशि में हुई हेराफेरी और चोरी के मामले में पुलिसिया कार्रवाई तेज हो गई है। पुलिस की प्राथमिक विवेचना में कई नए संदिग्धों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। मामले में निष्पक्षता और साक्ष्यों की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए पुलिस सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सहित अब तक जुटाए गए सभी अहम साक्ष्यों का फोरेंसिक परीक्षण (Forensic Test) कराने जा रही है।
जांच एजेंसियां न केवल गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका तय कर रही हैं, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही की भी गहनता से जांच कर रही हैं, ताकि उनकी आपराधिक जवाबदेही तय की जा सके।
3 IPS अधिकारियों की अगुवाई में बनी नई SIT
सुप्रीम कोर्ट में पूर्व गठित एसआईटी (SIT) की स्टेटस रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद, अब अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि कोतवाली में दर्ज एफआईआर की गहन जांच के लिए एक नई एसआईटी का गठन किया जा रहा है।
जांच टीम: तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों की अगुवाई में यह विशेष टीम गठित होगी।
मुख्य कार्य: यह टीम पूरे मामले की लगातार निगरानी करेगी, नए साक्ष्य जुटाएगी और अदालत में चार्जशीट (Charge Sheet) दाखिल करेगी।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी: चूंकि पूरा मामला देश की सर्वोच्च अदालत की निगरानी में है, इसलिए पुलिस हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है।
पुलिस का मुख्य ध्यान सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़े डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर है, ताकि अदालत में मामला पूरी मजबूती से टिक सके।
गिरफ्तार 8 आरोपियों से पूछताछ पूरी, लापरवाही की मंशा पर सवाल
उल्लेखनीय है कि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट की सिफारिशों पर ही इस मामले में पहली प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। पुलिस ने शुरुआती जांच के मुख्य बिंदुओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए अब तक 8 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पुलिस द्वारा सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ पूरी कर ली गई है। बयानों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चढ़ावे की गिनती की निगरानी के दौरान बरती गई घोर लापरवाही के पीछे जिम्मेदार लोगों की क्या मंशा थी।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी: अब तक का पूरा घटनाक्रम
13 जून: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने पहली एसआईटी का गठन किया। इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल थे।
23 जून: मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई वाली टीम ने गृह विभाग को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई।
25 जून: रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में 8 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।






