
CRS NEWS AGENCY :- देश की राजनीति में रोज़ नए मुद्दे आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन इस बार बहस किसी चुनाव, किसी बयान या किसी घोटाले पर नहीं… बल्कि उस ईंधन पर छिड़ गई है जिसे आप और हम अपनी गाड़ियों में भरवाते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं E20 पेट्रोल (E20 Petrol) की!कहने को तो यह 80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल का एक ऐसा मिश्रण है, जिसे पर्यावरण को बचाने और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने के लिए लाया गया था। लेकिन सरकार का यह ‘ग्रीन मास्टरस्ट्रोक’ अब विपक्ष के निशाने पर है और देश की सियासत का सबसे नया और सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है! अखिलेश यादव का बड़ा हमला: “इथेनॉल मुनाफ़ाख़ोरी का नया नाम है।इस सियासी जंग में सबसे बड़ा हमला समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बोला है। अखिलेश यादव ने सीधे सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे एक बड़ा गठजोड़ करार दिया है।इथेनॉल’ मुनाफ़ाख़ोरी का नया नाम है। यह ‘सरकारी मिलावट’ का एक ऐसा त्रि-मिश्रण है जिसमें सरकार, इथेनॉल बनाने वालों और तेल कंपनियों की सांठगांठ है।” – अखिलेश यादव*अखिलेश यादव ने उठाए E20 पेट्रोल पर ये गंभीर सवाल:*माइलेज में भारी गिरावट* : कम एवरेज की वजह से जनता को ज़्यादा तेल डलवाना पड़ रहा है।गाड़ियों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ा:* गाड़ियां जल्दी खराब हो रही हैं और स्टार्टिंग की समस्या बढ़ गई है।रीसेल वैल्यू और लाइफ पर असर:* बीच सड़क पर गाड़ियां धोखा दे रही हैं, जिससे उनकी ओवरऑल लाइफ और रीसेल वैल्यू घट रही है।
अरविंद केजरीवाल का ग्राउंड ज़ीरो से वार: “मिडिल क्लास के सिर से ऊपर जा रहा है पानी”*
इसी मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में सीधे ग्राउंड जीरो का रुख किया। उन्होंने कार मैकेनिकों और गाड़ी मालिकों से मुलाकात की और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया।
दिल्ली के गैराजों में E20 पेट्रोल के कारण खराब हुई गाड़ियों की लंबी लाइनें लगी हुई हैं। गाड़ियों का माइलेज बुरी तरह गिर चुका है और आम जनता परेशान है। मोदी सरकार को समझना होगा कि टीवी पर झूठे इंटरव्यू देने और फर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से ज़मीनी हक़ीक़त नहीं बदलेगी। लोगों पर E20 थोपना बंद करिए, अब पानी मिडिल क्लास के सिर से ऊपर जा रहा है।” – अरविंद केजरीवाल
*चौतरफा घिरी सरकार, मंत्रालय ने जारी किए सख्त निर्देश*
विपक्ष के इन तीखे हमलों और चौतरफा दबाव के बीच अब सरकार भी एक्शन में आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) ने हाल ही में एक हाई-लेवल Q&A नोट जारी किया है। मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है:
1. ईंधन के रखरखाव या सप्लाई चेन में किसी भी तरह की लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2. पेट्रोल में मिलावट या क्वालिटी के साथ समझौता करने वाले किसी भी शख्स या कंपनी के खिलाफ बेहद कड़ाई से निपटा जाए।
*लेकिन… यहाँ एक बड़ा पेंच है!*
मंत्रालय ने सख्त निर्देश तो जारी कर दिए हैं, लेकिन यह साफ नहीं किया है कि क्या देश में अभी तक कहीं बड़े पैमाने पर पेट्रोल में अवैध मिलावट पकड़ी गई है? ना ही सरकार ने किसी विशेष राज्य या किसी बड़ी कार्रवाई/जुर्माने की जानकारी सार्वजनिक की है। ऐसे में विपक्ष के आरोपों को और हवा मिल रही है।
*संजीवनी या जनता की जेब पर अदृश्य बोझ?तो सवाल बड़ा है… क्या E20 पेट्रोल वाकई पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी है, या फिर यह महंगाई से जूझती जनता की जेब पर एक और अदृश्य बोझ है?
एक तरफ विपक्ष इसे ‘सरकारी मिलावट’ बता रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार क्वालिटी सुधारने की दुहाई दे रही है। लेकिन इस सियासी लड़ाई के बीच फंसा है देश का वो आम आदमी, जिसकी गाड़ी बीच सड़क पर खड़ी हो रही है।






