
CRS NEWS :- 4800 करोड़ में बनी Lucknow-Kanpur Expressway एक हफ्ते में हुई खराब।
हाल ही में शुरू हुआ Lucknow-Kanpur Expressway ख़राब निर्माण गुणवत्ता और सड़कों की जर्जर हालत को लेकर विवादों में है। ‘द लल्लनटॉप’ (The Lallantop) की एक खोजी रिपोर्ट ने ₹4,800 करोड़ की लागत से बनी इस हाई-प्रोफाइल परियोजना की पोल खोलकर रख दी है। 13 जुलाई को उद्घाटन के बाद, यात्रा के शुरुआती कुछ किलोमीटरों के भीतर ही सड़क पर गहरे गड्ढे, दरारें और पैचवर्क दिखाई देने लगे हैं।
आइए जानते हैं Expressway के इस विवाद से जुड़ी सभी मुख्य बातें और सरकार व एनएचएआई (NHAI) द्वारा की गई कार्रवाई।
रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेसवे की स्थिति बेहद खराब है, Expressway के कई हिस्सों में डामर की पतली परतें पपड़ी बनकर उखड़ रही हैं।
सड़क पर कई जगह गहरी दरारें और धंसे हुए गड्ढे साफ देखे जा सकते हैं।
मरम्मत कार्य के कारण एक्सप्रेसवे पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
आपातकालीन मरम्मत कार्य के लिए सड़क के लगभग 80% हिस्से को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया है।
गाड़ियाँ सिंगल-लेन से गुजरने को मजबूर हैं। एक्सप्रेसवे की तेज़ रफ़्तार को देखते हुए यह यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने और जनता के गुस्से के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की है।
निर्माण करने वाली कंपनी PNC Infratech को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित कर दिया गया है और मरम्मत का पूरा खर्च उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रोजेक्ट से जुड़े कई प्रोजेक्ट डायरेक्टर्स और इंजीनियरों को निलंबित (suspend) या ट्रांसफर कर दिया गया है।
IIT खड़गपुर के प्रोफेसर करेंगे जांच।
मामले की गंभीरता को देखते हुए NHAI ने सड़क विशेषज्ञों (road experts) की एक विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति की अगुआई आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) के एक प्रोफेसर कर रहे हैं, जो निर्माण में हुई इन गंभीर कमियों के मुख्य कारणों की जांच करेंगे।. टोल टैक्स वसूली पर लगी रोक।
सड़क की खराब स्थिति और मरम्मत कार्य जारी रहने के कारण फिलहाल Lucknow-Kanpur Expressway पर टोल टैक्स (Toll Collection) की वसूली को स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से कड़ी निगरानी में काम पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।₹4,800 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बना Lucknow-Kanpur Expressway प्रशासनिक लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। अब देखना यह है कि आईआईटी विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी पर क्या अंतिम कानूनी और वित्तीय कार्रवाई होती है।






