
CRS NEWS AGENCY:- जंतर-मंतर पर शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। शुरुआत में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से भड़का यह आक्रोश अब सीधे प्रधानमंत्री की ओर केंद्रित हो गया है।
नीट (NEET) परीक्षा की कथित अनियमितताओं से गुस्साया मध्यवर्ग, जो लंबे समय से शांत था, पहली बार इस तरह सड़कों पर उतरा है। मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और नागपुर जैसे प्रमुख शहरों में प्रदर्शन तेजी से फैल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सोनम वांगचुक के अनशन को जबरन खत्म कराने के फैसले ने इस आंदोलन में ‘आग में घी’ का काम किया।
संसद के नए सत्र से ठीक पहले जंतर-मंतर को सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जरिए छावनी में बदल दिया गया है। 20 जुलाई के प्रस्तावित मार्च को अवैध घोषित किए जाने के बावजूद, विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कर छात्रों को समर्थन देने का ऐलान किया है।
प्रोफेसर अखिल स्वामी का मानना है कि सरकार को बल प्रयोग से बचना चाहिए। छात्रों, महिलाओं या बुजुर्गों पर किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई से यह आक्रोश पूरे देश में बेकाबू हो सकता है। यह स्थिति मौजूदा सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित हो रही है।






