
CRS NEWS बिजनौर। बदलते दौर में सरकारों की प्राथमिकताएं और संवाद का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। राजनीतिक विरोधियों के बजाय अब सरकारों का खास ध्यान नई पीढ़ी, खासकर Gen-Z और Gen-Alpha पर केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में बीते दिनों लखनऊ से लेकर हमीरपुर तक नई पीढ़ी की सक्रियता ने शासन-प्रशासन को यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में युवाओं और स्कूली बच्चों की सोच, सवाल और अपेक्षाओं को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
इसी को देखते हुए सरकार और प्रशासनिक स्तर पर स्कूलों को संवाद का अहम केंद्र बनाया जा रहा है। अधिकारियों को बच्चों के बीच पहुंचकर उनसे सीधे बातचीत करने, उनकी समस्याएं समझने और उनके विचार जानने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि नई पीढ़ी के साथ औपचारिक बैठकों के बजाय अनौपचारिक संवाद स्थापित करने से प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।
बच्चों के बीच पहुंच रहे अधिकारी
प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ संवाद करने का सिलसिला तेज हुआ है। अधिकारियों का प्रयास है कि बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं उनके सामने रख सकें। इसके लिए कई जगह अधिकारियों को बच्चों के साथ बैठकर बातचीत करने और उनके साथ भोजन करने जैसी गतिविधियों में भी शामिल किया जा रहा है।
प्रशासन का मानना है कि कक्षा और कार्यालय की औपचारिक सीमाओं से बाहर निकलकर बच्चों के साथ सहज माहौल में बातचीत करने से उनकी वास्तविक समस्याओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। खासकर शिक्षा, स्कूल की सुविधाओं, सुरक्षा, खेल, डिजिटल तकनीक और भविष्य से जुड़े सवालों पर बच्चों की राय सीधे जानने की कोशिश की जा रही है।
बिजनौर में डीएम ने बच्चों के साथ किया भोजन
इसी क्रम में बिजनौर की जिलाधिकारी जसजीत कौर ने भी Gen-Alpha पीढ़ी के बच्चों के साथ समय बिताया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ बैठकर भोजन किया और उनसे बातचीत करते हुए उनकी समस्याओं एवं जरूरतों को जाना। जिलाधिकारी ने बच्चों से स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं, पढ़ाई के माहौल और उनकी व्यक्तिगत रुचियों से जुड़े विषयों पर भी संवाद किया।
बच्चों के साथ भोजन करने का उद्देश्य केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं माना जा रहा है। अधिकारियों की कोशिश है कि बच्चों के साथ ऐसा सहज माहौल बने, जिसमें वे बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें। प्रशासनिक स्तर पर इसे नई पीढ़ी के साथ विश्वास और बॉन्डिंग मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
बदलती पीढ़ी के साथ बदल रहा प्रशासन का अंदाज
Gen-Z और Gen-Alpha इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के दौर में पली-बढ़ी पीढ़ियां हैं। ये पीढ़ियां सवाल पूछने, अपनी राय रखने और घटनाओं पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के लिए जानी जाती हैं। ऐसे में शासन-प्रशासन के सामने चुनौती केवल योजनाएं लागू करने की नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को समझने और उससे लगातार संवाद बनाए रखने की भी है।
यही वजह है कि स्कूलों से शुरू किया गया यह संवाद भविष्य की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का बच्चों के साथ बैठना, उनकी बातें सुनना और उनके साथ भोजन करना प्रशासन की पारंपरिक कार्यशैली से अलग पहल के रूप में देखा जा रहा है।
अब सवाल यह है कि नई पीढ़ी के साथ शुरू हुआ यह संवाद कितने समय तक जारी रहता है और बच्चों द्वारा बताई गई समस्याओं का समाधान जमीनी स्तर पर किस तरह होता है। अगर संवाद के साथ समस्याओं के समाधान पर भी उतना ही जोर दिया गया, तो यह पहल प्रशासन और नई पीढ़ी के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी साबित हो सकती है।






