
CRS NEWS AGENCY:-मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के उत्तरी क्षेत्रों, विशेष रूप से तेहरान और सेमन प्रांत में सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की मिसाइल और रक्षा क्षमताओं को कमजोर करना बताया जा रहा है।
इन हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कतर और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। दोनों देशों के बीच बढ़ते इस सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। सबसे अधिक चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है, जहां किसी भी बड़े संघर्ष का असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उछाल आ सकता है।
वहीं, यमन में भी हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। हुती संगठन के प्रमुख अब्दुल मलिक अल-हुती ने सऊदी अरब को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यमन पर हमले जारी रहे तो सऊदी के तेल प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। इस बीच अमेरिका ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता और हथियारों की आपूर्ति जारी रखने का संकेत दिया है।
तेहरान में भी विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। एंगेलाब चौक पर लगाए गए एक विवादास्पद बिलबोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। कुल मिलाकर, अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब और यमन से जुड़े ताजा घटनाक्रम मिडिल ईस्ट को एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक संकट की ओर ले जाते दिखाई दे रहे हैं।






