
CRS NEWS AGENCY:- (CIA BIO WEAPON)हाल ही में प्रख्यात प्रतिरक्षा विज्ञानी (Immunologist) डॉ. रॉबर्ट मैलोन, जिन्हें mRNA वैक्सीन की आधारशिला रखने का श्रेय दिया जाता है, ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. मैलोन का दावा है कि यह एजेंसी घातक जैविक हथियार विकसित कर रही है।
मुख्य बिंदु और विश्लेषण:
1. डॉ. मैलोन के आरोप और ‘प्रोजेक्ट 112’
शीत युद्ध के समय के सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों का हवाला देते हुए, डॉ. मैलोन ने आरोप लगाया कि 1960 के दशक में अमेरिकी सरकार ने ‘प्रोजेक्ट 112’ के तहत कनेक्टिकट में रेडियोधर्मी टिक्स (एक प्रकार के कीट) छोड़े थे। उनका मानना है कि लाइम रोग (Lyme disease) के पहले दर्ज मामलों के लिए यही प्रयोग जिम्मेदार थे।
2. क्या होते हैं जैविक हथियार?
जैविक हथियार पारंपरिक हथियारों से अलग होते हैं। इनमें प्रयोगशालाओं में तैयार किए गए वायरस, बैक्टीरिया, कवक (Fungi) या विषाक्त पदार्थों का उपयोग मनुष्यों, जानवरों या पौधों को नुकसान पहुँचाने के लिए किया जाता है। इसके अंतर्गत बीमारी फैलाने वाले कीड़ों को पैदा करना और उन्हें युद्ध के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना भी शामिल है।
3. अंतरराष्ट्रीय कानून और ऐतिहासिक संदर्भ
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका पर ऐसे आरोप लगे हैं। इतिहास में 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान भी इजरायल पर इसी तरह की रणनीति अपनाने के आरोप लगे थे। 1972 का ‘जैविक हथियार सम्मेलन’ (BWC) इन हथियारों के विकास और उपयोग पर रोक लगाता है। भारत भी इस संधि का हिस्सा है, लेकिन इस कानून में मौजूद खामियों के कारण इसे शक्ति से लागू करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
4. एआई (AI) और जैविक युद्ध का भविष्य
भविष्य की सबसे बड़ी चिंता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI जैविक हथियारों के निर्माण और उनके प्रसार को आसान बना सकता है, जिससे यह खतरा और भी सुलभ और विनाशकारी हो जाएगा।










