
CRS NEWS : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल गई है। हालांकि ईरान ने इस तरह के किसी विशेष समझौते से इनकार किया है और इसे संवेदनशील मामला बताया है।
समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार गुरुवार को सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर एक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते मुंबई पहुंचा। लाइबेरिया के ध्वज वाला यह जहाज ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया से भारत पहुंचने वाला पहला कच्चा तेल वाहक बताया जा रहा है। इसके अलावा विदेशी ध्वज वाले दो अन्य जहाज भी हाल ही में इस जलमार्ग से गुजर चुके हैं और उनके भी भारत पहुंचने की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद ईरान ने मंगलवार देर रात भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग का आश्वासन दिया था। हालांकि इस वार्ता के बाद जारी आधिकारिक बयान में भारतीय जहाजों के लिए विशेष अनुमति देने का कोई उल्लेख नहीं किया गया।ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में फारस की खाड़ी में जहाजों की असुरक्षा के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं तेहरान के अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने किसी भी देश को अलग से विशेष अनुमति नहीं दी है और समुद्री मार्ग से गुजरने के नियम सभी देशों के लिए समान हैं।
इस बीच भारत सरकार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर लगातार ईरान के संपर्क में बनी हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच तीन बार बातचीत हो चुकी है। अंतिम बातचीत में जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।जायसवाल ने कहा कि भारत अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस विषय पर संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण यह मार्ग लगभग प्रभावित हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है। स्थिति को देखते हुए भारत फिलहाल वैकल्पिक मार्गों से तेल और गैस आयात करने की कोशिश कर रहा है। वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत तेल गैर-होर्मुज मार्गों के जरिए भारत लाया जा रहा है।










