पश्चिमी एशिया में चल रहे, त्रिकोणीय युद्ध में, ट्रंप की मदद में क्या हम भारतीयों को फिर से लॉक_डाउन की भेट चढ़ा दिया जाएगा..?

इमरान सागर की कलम से।
ईरान इजराइल युद्ध में फंसे अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधान मंत्री मोदी को मदद के लिए फोन किया। दोनों के बीच लंबी वार्ता में क्या कहा गया, यह पूरी तरह साफ नहीं है क्योंकि, भारतीय मीडिया भी इसका खुलासा कर पाने में सक्षम नहीं लगती। स्टेट ऑफ़ हारमोंस को खुलवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किस हद तक जा सकता है यह आज, दुनिया से छिपा नहीं है।
भारतीय मीडिया के अनुसार अमेरिकी प्रधान मंत्री की, भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोजी जी क्या मदद कर सकते है..? मेरे हिसाब से भारत अपनी आर्मी तो भेजने से रहा क्योंकि भारत की दोस्ती ईरान से भी है जो जग जाहिर है और सबसे बड़ी बात यह कि ईरान के आगे शायद कोई आर्मी, फिलहाल तो टिकने की हिम्मत नहीं रखती।
दूसरे यह कि ट्रंप की आर्थिक मदद के लिए भारत पहले से ही अमेरिका की ओर से लगाए गए बड़े टैरिफ झेल रहा है तो अब दूसरा विकल्प यह कि हो सकता है कि भारत में इस समय तमाम ऐसे संगठन सक्रिय है जो स्वयं असली भक्त दर्शाने में अपनी ताकत के प्रदर्शन अपने घर (भारत) में, अपने ही लोगों के लिए करते नजर आते है, उन्हें अमेरिका की मदद के लिए भेज दिया जाए या फिर तीसरा विकल्प जो सबसे कमजोर जिससे अपने ही देशवासियों पर सख्त पाबंदी के रूप में #लॉक_डाउन की ओर धकेल कर तमाम चीजों पर कंट्रोल करना नहीं बल्कि उच्च व्यापारी वर्ग को सभी जरूरत की चीजों की कालाबाजारी में जम कर छूट देना और लूटमार कर अपनी तिजोरियां भरवाने में सक्षम बनाना हो सकता है।
अब सोचना है हम भारतवासियों को है कि हम किस विकल्प के लिए तैयार हैं। यह कहने भर से कुछ नहीं होने वाला कि युद्ध हमसे बहुत दूर है हमे क्या लेकिन एक सबसे मजबूत जमीनी हकीकत यह भी है कि ट्रंप की दोस्ती पर हम सवा सौ करोड़ भारतीयों को लॉक डाउन की त्रासदी की फिर झोंकते हुए भेट चढ़ाने में रत्तीभर गुरेज नहीं किया जायेगा तब जब की विपक्ष बड़ी मजबूती से अपनी जमीन बनाने में लगा है लेकिन हालत के मद्दे नजर और हर एक अपनी अर्थ व्यवस्था के लिहाज से आखिर विश्वास किस पर करे यह बड़ी विडंबना का विषय दिखाई दे रहा है।
(फोटो, गूगल कॉपी पेस्ट)









