
CRS NEWS लखनऊ। बुद्धेश्वर क्षेत्र में भैंसों को पकड़े जाने और उनकी प्रस्तावित नीलामी के विरोध में सोमवार को AIMIM ने मोर्चा खोल दिया। उत्तर प्रदेश सेंट्रल AIMIM अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और महापौर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बुद्धेश्वर क्षेत्र की एक घटना में एक मानसिक रूप से कमजोर युवक की गलती की आड़ में गद्दी समाज के 150 से अधिक परिवारों की 450 से ज्यादा भैंसें पकड़ ली गईं। पार्टी का आरोप है कि पशुओं को उनके घरों से कई किलोमीटर दूर ले जाया गया तथा कुछ स्थानों पर बिना पूर्व नोटिस और रसीद दिए कार्रवाई की गई। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ घरों में महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बिना प्रवेश किया गया और ताले तोड़े गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
AIMIM नेताओं ने कहा कि पशुपालकों की रोजी-रोटी इन भैंसों से जुड़ी है। पशुओं के पकड़े जाने से परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी ने दावा किया कि कांजी हाउस में रखे गए पशुओं के लिए पर्याप्त चारा-पानी और चिकित्सकीय देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। ज्ञापन में पशुओं की स्थिति की तत्काल जांच कराने की मांग भी की गई।
पांच सूत्रीय मांगें रखीं
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें भैंसों की नीलामी पर तत्काल रोक लगाने, कांजी हाउस में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा-पानी और पशु चिकित्सक की व्यवस्था करने, 24 घंटे के भीतर पशुपालकों को रसीद उपलब्ध कराकर नियमानुसार जुर्माना लेने के बाद पशुओं को वापस करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा AIMIM ने पशुपालकों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए लाइसेंस जारी कर डेयरी जोन में स्थायी स्थान उपलब्ध कराने की मांग की। पार्टी ने कार्रवाई के दौरान महिलाओं के साथ कथित अभद्रता के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि पशुपालकों को अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शहर में पशुपालन को लेकर नियमों और स्थान की समस्या है तो प्रशासन को लाइसेंस और निर्धारित डेयरी जोन की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि पशुपालकों की रोजी-रोटी भी चलती रहे और शहर की व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
AIMIM ने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g), 21 और 300A समेत विभिन्न कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए। पार्टी ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के प्रावधानों का भी उल्लेख किया।
पार्टी नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल पशुओं को वापस कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े परिवारों की आजीविका का सवाल है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर नीलामी रोकने और पशुपालकों को राहत देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो AIMIM आंदोलन को आगे बढ़ाएगी।
नोट: ज्ञापन में जिन कानूनी धाराओं और न्यायालय के कथित आदेशों का हवाला दिया गया है, उनकी सटीक कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित प्रकरण के दस्तावेजों और न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है।







