
आरक्षण सुधार आंदोलन के प्रतिनिधिमंडल को दो दिन में केंद्रीय नेतृत्व से वार्ता का आश्वासन
CRS NEWS लखनऊ। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आरक्षण सुधार आंदोलन को लेकर शनिवार को लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हर्ष दुबे के साथ पत्रकार वार्ता की। इस दौरान छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की ओर से उठाई जा रही विभिन्न मांगों और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना गया। उपमुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को आगामी दो दिनों के भीतर प्रभावी ढंग से केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा।
पत्रकार वार्ता के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा युवाओं के हितों से संबंधित अपनी चिंताओं को सामने रखा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लंबे समय से इन मुद्दों को लेकर छात्रों और युवाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए उचित समाधान की दिशा में ठोस पहल किए जाने की अपेक्षा जताई।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने छात्र प्रतिनिधियों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए कहा कि युवाओं और छात्रों से जुड़े विषय महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि संबंधित केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रभावी तरीके से रखा जाएगा, ताकि उचित स्तर पर इन पर विचार हो सके।
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात का भरोसा
बैठक में उपमुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की संबंधित केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कराने का प्रयास किया जाएगा और इसके लिए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी दो दिनों में इस दिशा में पहल करते हुए छात्रों की बात केंद्रीय स्तर तक पहुंचाई जाएगी।
इस आश्वासन के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर सकारात्मक तरीके से विचार होगा और केंद्र सरकार के स्तर पर संबंधित विषयों का समाधान निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पत्रकार वार्ता के दौरान आरक्षण सुधार आंदोलन से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति और सरकार के समक्ष मांगें रखने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।
गौरतलब है कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार को लेकर आंदोलन चल रहा है। आंदोलन से जुड़े छात्र अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। लखनऊ में हुई इस वार्ता को आंदोलनकारी छात्रों और सरकार के बीच संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें आगामी दो दिनों में होने वाली पहल और केंद्रीय नेतृत्व के साथ संभावित वार्ता पर टिकी हैं।







