
CRS NEWS रायबरेलीः- 03 जून 2026 दिव्यांगजनों के शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति आचार्य संजय सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को जनपद के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, समाज कल्याण विभाग, प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभागों तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण विभागीय बैठक का आयोजन विकास भवन स्थित महात्मा गांधी सभागार में किया गया। बैठक में विभिन्न विभागों, संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए दिव्यांगजनों के समग्र विकास एवं उच्च शिक्षा में उनकी सहभागिता बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ सभी प्रतिभागियों के परिचय एवं स्वागत के साथ हुआ। इसके उपरांत विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, शैक्षणिक गतिविधियों एवं दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाओं पर आधारित एक लघु डॉक्यूमेंटरी का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय की कार्यशैली एवं दृष्टिकोण से परिचित कराया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय देश में समावेशी, गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को आत्मनिर्भर, सक्षम और समाजोपयोगी नागरिक के रूप में विकसित करना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “सेवा, संवेदना और सहयोग आधारित शिक्षा ही हमारा संकल्प और ध्येय है।”
कुलपति ने विश्वविद्यालय में संचालित स्नातक, स्नातकोत्तर, व्यावसायिक एवं शोध कार्यक्रमों, आधुनिक अधोसंरचना, छात्रवृत्ति सुविधाओं, तकनीकी संसाधनों तथा दिव्यांगजन-अनुकूल वातावरण की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों से विश्वविद्यालय के प्रवेश अभियान को जन-जन तक पहुँचाने तथा अधिकाधिक दिव्यांग एवं वंचित विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने में सहयोग प्रदान करने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण भावी योजना की जानकारी देते हुए बताया कि दिव्यांग विद्यार्थियों को उनके गृह क्षेत्र के निकट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रयागराज एवं वाराणसी में क्षेत्रीय केंद्र (रीजनल सेंटर) स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, परामर्श एवं शैक्षणिक सहयोग की सुविधाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी, जिससे दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांगजनों को विशेष लाभ प्राप्त होगा।
कुलपति ने विश्वविद्यालय की एक उल्लेखनीय उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय के 13 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने बिना राइटर (लेखन सहायक) की सहायता के स्वयं कंप्यूटर के माध्यम से परीक्षा उत्तीर्ण कर एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित तकनीकी एवं शैक्षणिक सहयोग प्रणाली की सफलता का प्रमाण है तथा दिव्यांग विद्यार्थियों की क्षमता और आत्मविश्वास को भी दर्शाती है।
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा दिव्यांगजनों के कल्याण एवं शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते समय आने वाली चुनौतियों, समस्याओं एवं संभावित समाधानों पर विचार व्यक्त किए। उपस्थित प्रतिभागियों ने समन्वित प्रयासों के माध्यम से दिव्यांगजनों तक सरकारी योजनाओं और शैक्षणिक अवसरों को पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सुभाशीष संस्थान के निदेशक ऐश्वर्य श्रीवास्तव ने दिव्यांगजनों के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि इन योजनाओं की सफलता के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय में प्रवेश एवं नामांकन बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया आधारित जागरूकता अभियान, पेड डिजिटल प्रमोशन तथा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सहभागिता प्रभावी सिद्ध हो सकती है।
जिला समाज कल्याण विभाग, रायबरेली के प्रतिनिधि मोहन त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय द्वारा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रवेश अभियान में पूर्ण सहयोग एवं समर्थन प्रदान करने का आश्वासन दिया। इसी क्रम में उपस्थित अन्य विभागीय अधिकारियों एवं संस्थागत प्रतिनिधियों ने भी विश्वविद्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर दिव्यांगजनों को उच्च शिक्षा से जोड़ने हेतु हर संभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के सह-आचार्य डॉ. विजय शंकर शर्मा ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया, विभिन्न पाठ्यक्रमों, पात्रता मानदंडों तथा आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को विश्वविद्यालय की सुविधाओं और प्रवेश प्रक्रिया के बारे में जागरूक करें।
कार्यक्रम में उप निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, लखनऊ मंडल राजेश कुमार मिश्रा, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी रायबरेली विकास वर्मा, विश्वविद्यालय के डॉ. श्याम सिंह (सहायक प्रोफेसर), डॉ. रंजीत कुमार (मैनेजर वर्कशॉप), डॉ. आरती शुक्ला, के.एस. मेमोरियल कॉलेज, रायबरेली की प्राचार्य, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, रायबरेली की प्राचार्या सुनीता सिंह, तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, समाज कल्याण विभाग, प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभागों सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक का समापन दिव्यांगजनों के हित में विभिन्न विभागों, संस्थानों एवं विश्वविद्यालय के मध्य निरंतर समन्वय, सहयोग एवं साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ हुआ।










