
अंतिम जांच में तत्कालीन प्रधान और सचिव दोषी, प्रधान धनराज यादव प्रशासक पद से हटाए गए; एडीओ पंचायत को मिली जिम्मेदारी
CRS NEWS रायबरेली, 21 अगस्त। ऊंचाहार विकासखंड की ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात में विकास कार्यों के नाम पर हुई वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अंतिम जांच में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच समिति ने उपलब्ध अभिलेखों, स्थलीय निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण के आधार पर ग्राम पंचायत में कुल 6,88,211.40 रुपये की वित्तीय अनियमितता पाए जाने की पुष्टि की है। मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान/प्रशासक धनराज यादव और ग्राम पंचायत सचिव/ग्राम विकास अधिकारी रूद्र प्रताप सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया है।
जिला मजिस्ट्रेट सरनीत कौर ब्रोका के अनुसार यह मामला उत्तर प्रदेश विधानसभा की याचिका समिति के निर्देशों के क्रम में सामने आया था। ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात से संबंधित शिकायत/याचिका संख्या 1011/2019 की विस्तृत जांच कराई गई। मामले में संयुक्त आयुक्त, मनरेगा, ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश की ओर से 7 फरवरी 2025 को जांच समिति गठित की गई थी। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के 6 जनवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में अंतिम जांच समिति गठित कर मामले की दोबारा विस्तृत जांच की गई।
104 कार्यों की पत्रावलियां नहीं मिलीं
अंतिम जांच के दौरान ग्राम पंचायत की ओर से करीब 104 कार्यों से संबंधित पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं। इसके चलते इन कार्यों की जांच संभव नहीं हो सकी। हालांकि उपलब्ध अभिलेखों और मौके पर किए गए स्थलीय सत्यापन में कई विकास कार्यों में गंभीर अंतर सामने आया।
जांच में इंटरलॉकिंग और खड़ंजा निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों की माप पुस्तिका में दर्ज विवरण और मौके पर वास्तविक निर्माण की स्थिति में अंतर पाया गया। छह निर्माण कार्यों की जांच में ही 1,99,532.24 रुपये का अधिक भुगतान/वित्तीय अनियमितता सामने आई।
हैंडपंप, ह्यूम पाइप और स्ट्रीट लाइट के कार्य भी जांच के घेरे में
जांच केवल सड़क और इंटरलॉकिंग कार्यों तक सीमित नहीं रही। ह्यूम पाइप की स्थापना, इंडिया मार्का हैंडपंपों के रीबोर एवं प्लेटफार्म निर्माण तथा स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत से संबंधित कार्यों में भी अनियमितताएं पाई गईं।
इन कार्यों में जांच समिति ने कुल 4,88,679.16 रुपये के अधिक भुगतान/दुरुपयोग की पुष्टि की। निर्माण कार्यों से संबंधित अनियमितताओं में पाई गई 1,99,532.24 रुपये की राशि को जोड़ने पर ग्राम पंचायत में कुल वित्तीय अनियमितता 6,88,211.40 रुपये आंकी गई।
प्रधान और सचिव पर आधी-आधी वसूली
अंतिम जांच में तत्कालीन ग्राम प्रधान/प्रशासक धनराज यादव और ग्राम पंचायत सचिव/ग्राम विकास अधिकारी रूद्र प्रताप सिंह को वित्तीय अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी माना गया है। प्रशासन के अनुसार ग्राम प्रधान को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, लेकिन उनके स्पष्टीकरण में आरोपों के निराकरण के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
वहीं राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग से संबंधित कार्यों के अभिलेख भी समय से उपलब्ध नहीं कराए गए। संबंधित सचिव के विरुद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की कार्रवाई भी की गई है।
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत वित्तीय अनियमितता की राशि की वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अंतिम जांच में निर्धारित 6,88,211.40 रुपये की राशि की आधी-आधी वसूली के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत 3,44,105 रुपये सचिव और 3,44,105 रुपये निवर्तमान ग्राम प्रधान/प्रशासक से वसूल किए जाएंगे। वसूली की धनराशि ग्रामनिधि में जमा कर उसकी रसीद जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी।
दोषी पाए जाने के बाद प्रशासक पद से हटाए गए धनराज यादव
मामले में सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं वर्तमान प्रशासक धनराज यादव को लेकर की गई है। ग्राम पंचायत का निर्वाचित कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ऊंचाहार देहात ग्राम पंचायत में प्रशासक नियुक्त किया गया था।
लेकिन अंतिम जांच में वित्तीय एवं अन्य अनियमितताओं के लिए दोषी पाए जाने और उनके विरुद्ध कार्रवाई लंबित होने के बाद शासन के प्रावधानों के तहत उन्हें प्रशासक पद पर बनाए रखना उचित नहीं माना गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने धनराज यादव को प्रशासक पद से हटाने का निर्णय लिया है।
उनके स्थान पर सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), ऊंचाहार को ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात का नया प्रशासक नियुक्त किया गया है। अब ग्राम पंचायत की वित्तीय एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी एडीओ पंचायत के पास रहेगी।
2019 की शिकायत से शुरू हुआ मामला
ऊंचाहार देहात ग्राम पंचायत से संबंधित यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज शिकायत/याचिका से शुरू हुआ था। लंबे समय तक चले जांच क्रम के बाद पहले जांच समिति गठित हुई और बाद में न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अंतिम जांच कराई गई। वर्षों बाद आई अंतिम जांच रिपोर्ट में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने से पंचायत स्तर पर विकास कार्यों और अभिलेखों के रखरखाव को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
प्रशासन की कार्रवाई से स्पष्ट है कि पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन के इस्तेमाल में अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वसूली के साथ-साथ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। खास तौर पर दोषी पाए गए व्यक्ति को पंचायत की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां सौंपने पर भी रोक का प्रावधान लागू किया गया है।







