बाढ़ प्रभावित कसारी पहुंचे प्रभारी मंत्री, ग्रामीणों का जाना हाल। राहत राशन किट बांटी, बांध निर्माण और क्षति का मुआवजा दिलाने के दिए निर्देश।

शाहजहांपुर, 14 सितंबर। प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार एवं जिले के प्रभारी मंत्री नरेंद्र कश्यप ने सोमवार को जलालाबाद क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित ग्राम कसारी का निरीक्षण कर ग्रामीणों का हाल जाना। उनके साथ जलालाबाद विधायक हरिप्रकाश वर्मा और जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह मौजूद रहे।
प्रभारी मंत्री ने गांव में जलभराव, आवागमन और राहत-बचाव व्यवस्थाओं का जायजा लिया। ग्रामीणों ने गांव को बाढ़ से बचाने के लिए बांध निर्माण की मांग रखी। मंत्री ने बाढ़ का पानी उतरने के बाद बांध निर्माण की कार्रवाई जल्द शुरू कराने का आश्वासन दिया। संपर्क मार्ग की समस्या पर उन्होंने दोनों ओर दीवार निर्माण कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित परिवारों तक खाद्य सामग्री, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य राहत सामग्री समय से पहुंचाने तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। साथ ही जनहानि, पशुहानि और फसल क्षति का सर्वे कर प्रभावितों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने को कहा।
इसके बाद प्रभारी मंत्री ने कोला स्थित विद्यालय में बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को राहत राशन किट वितरित की। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उनके मकान रहने लायक नहीं बचे हैं। इस पर मंत्री ने अधिकारियों को उनके रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जलालाबाद के 19 गांव बाढ़ से प्रभावित
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने बताया कि वर्तमान में जलालाबाद तहसील के 19 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। चार बाढ़ शरणालय संचालित हैं और निगरानी के लिए 13 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। राहत एवं बचाव कार्य के लिए 30 नाव और 10 मोटर बोट उपलब्ध हैं।
प्रशासन के अनुसार 98.5 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिसमें 72.6 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि, 25.9 हेक्टेयर बोया गया क्षेत्र और 9.3 हेक्टेयर कटान प्रभावित क्षेत्र शामिल है। फसल क्षति का अनुमानित मूल्य 9.2 लाख रुपये है।
अब तक 1,688 लोगों का उपचार, 276 पशुओं का उपचार और 1,263 पशुओं का टीकाकरण कराया गया है। प्रभावित परिवारों को 330 खाद्यान्न पैकेट, 330 तिरपाल, 2,820 ओआरएस पैकेट और 1,450 क्लोरीन टैबलेट वितरित की जा चुकी हैं। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के साथ पेयजल, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखने का दावा किया है।






