
CRS AGENCY। इंडिया महागठबंधन विगत 26 जुलाई को मोदी सरकार के खिलाफ नियम 198 के तहत अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था।जिसे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया. अब उस पर बहस हो रही है अविश्वास प्रस्ताव लाने का एक प्रमुख मकसद यही है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर पीएम को सदन में चर्चा के लिए आना चाहिए. पीएम जवाब देने के लिए सदन में नहीं आएंगे तो सवाल खड़ा होगा कि वह संसद का सामना करना से बच रहे हैं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नीतीश कुमार, सांसद मनोज झा, आप के राघव चड्डा सहित कई बड़े नेता मणिपुर हिंसा को लेकर सदन में पीएम के जवाब की लगातर मांग कर रहे हैं. पीएम मोदी ने संसद में अभी इस पर कुछ नहीं बोला है. हालांकि गृहमंत्री अमित शाह इस पर जवाब देने को तैयार थे, लेकिन विपक्ष राजी नहीं था।इसके पहले जब 2018 में इसी तरह का अविश्वास प्रस्ताव मोदी सरकार के खिलाफ लाया गया था, उस समय शिवसेना (यूबीटी) एऩडीए के साथ थी. इसके अलावा नीतीश कुमार जो पहले एनडीए के साथ थे, अब वह भी इस मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी ‘इंडिया’ के पाले में हैं. हालांकि विपक्ष को भी अच्छी तरह पता है कि यह प्रस्ताव सदन में कहीं भी नहीं टिकेगा.लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा 272 है. वहीं अकेले बीजेपी के पास 300 से अधिक सीटें हैं. पूरे इंडिया गठबंधन की मिला लें तो आंकड़ा मात्र 141 तक पहुंचता है. इस लिहाज से अविश्वास प्रस्ताव का गिरना तो तय है. अगर पीएम मोदी मणिपुर हिंसा पर जवाब देने के लिए सदन में आ जाते हैं तो इस मायने में विपक्ष की जीत हो सकती है.जहां तक संसद में इस अविश्वास प्रस्ताव की बात है तो विपक्ष भी अच्छी तरह जानता है कि वह बड़ी आसानी से गिर जाएगा. संसद के दोनों सदनों उच्च राज्य सभा और लोअर हाउस लोकसभा में बहुमत के मामले में एऩडीए क्या अकेले बीजेपी ही भारी पड़ती दिख रही है.








